बरसाना के बाद शनिवार को नंदगांव में लठमार होली का भक्तों ने आनंद लिया। बदलाव था तो बस यही कि अबकी बार होली कान्हा के गांव में खेली गई। नंदगांव की हुरियारिनें ने बरसाना के हुरियारों पर प्रेम पगे लठ बरसाए तो वातावरण सतरंगी हो गया। इस अद्भुत और अलौकिक दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आए। हर कोई होली के रंगों में सराबोर था।
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नंदगांव की लठमार होली
- फोटो : अमर उजाला
नंदगांव की लठमार होली में हुरियारे थे श्रीजी के गांव के गोप और हुरियारिन नटखट कन्हैया के गांव की गोपियां। एक दिन पूर्व बरसाना में खेली गई होली के परिणामस्वरूप बरसाना के सखी स्वरूप ग्वाल होली का फगुआ मांगने आये। नंदलाला के गांव में हुरियारों ने जमकर धमाल मचाया।
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नंदगांव की लठमार होली
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दोपहर करीब ढाई बजे बरसाना के हुरियारे यशोदा कुंड पर राधा स्वरूप पताका लेकर यशोदा कुंड पहुंचे। नंदगांव के लोगों ने उनका स्वागत किया। जब बरसाना के हुरियारे नंदगांव में पहुंचे तो उन्हें जानकारी थी कि अब लाठियों की बरसात होने वाली है। इससे बचने के लिए उन्होंने यसोदा कुंड पर ही पूरी तैयारी कर ली। सभी ने लठमार होली से अपने सिर को बचाने के लिए पगड़ी बांध ली।
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नंदगांव की लठमार होली
- फोटो : अमर उजाला
भांग छानकर हुरियारे पाग बांधकर हंसीं ठिठोली करते नंदभवन पहुंचे। यहां नंदबाबा सहित परिवार के दर्शन किए। नंदभवन में पहुंचते ही ग्वालों ने हुरियारों को रंग से सराबोर कर दिया। नंदगांव बरसाना के समाजियों ने कृष्ण-बलराम के विग्रहों के सामने संयुक्त समाज गायन किया।
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नंदगांव की लठमार होली
- फोटो : अमर उजाला
शाम तकरीबन पांच बजे रंगीली चौक पर हुरियारे और हुरियारिन आए और नृत्य-गायन किया। चंदा छिपमत जईयौ आज, श्याम संग होरी खेलूंगी..। इसके बाद प्रेम भरी लाठियों की बरसात शुरू होती है। देश-विदेश से आए हजारों लोगों ने लठमार होली का यह अद्भुत दृश्य देखा।
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नंदगांव की लठमार होली
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कृष्णकाल में भगवान श्री कृष्ण फागुन सुदी नवमी को होली खेलने बरसाना गए और बिना फगुवा नेग दिए ही वापस लौट आए थे। बरसाना की गोपियों ने कन्हैया से होली का फगुवा लेने के लिए नंदगांव जाने की सोची। राधाजी ने बरसाना की सभी सखियों को एकत्रित किया और बताया कि कन्हैया बिना फगुवा दिए ही लौट गए हैं। हमें नंदगांव चलकर उनसे फगुवा लेना है। बस फिर क्या, अगले दिन ही दसमी को बरसाना की ब्रजगोपियां होली का फगुवा लेने नंदगांव आती हैं।
नंदगांव में लठमार होली खेलने से पूर्व हुरियारों ने गली गली घूमकर हुरियारिनों से जमकर हंसी ठिठोली की। इसके बाद हुरियारिनों ने बरसाना के हुरियारों पर प्रेम पगी लाठियों से प्रहार किया। गोपियों से लाठियों की मार खाकर भी हुरियारे मतवाले बने रहे। हंसी ठिठोली के बाद लठमार समापन के दौरान हुरियारिनों के पैर छू क्षमा प्रार्थना की।