जो रस बरस रह्यौ बरसाने वो रस तीन लोक में नाएं...। बरसाना की रंगीली गली में द्वापरकालीन की लीला मंगलवार को फिर सजीव हो उठी। लठामार होली के दौरान लाठी की चोट और ढाल की ओट के बीच बरसते रंग-गुलाल से बरसाना सतरंगी हो गया। हुरियारिनों ने मस्ती में डूबे नंदगांव के हुरियारों पर लाठियां बरसाईं। हुरियारों ने ढालों पर लाठियों के वार को सहा। इस दौरान रंग-गुलाल संग बदरा भी बरसे तो मानो लगा कि राधा-कृष्ण की लीला को देखने के लिए इंद्रदेव प्रकट हो गए। इस अनूठी होली के लाखों श्रद्धालु साक्षी बने।
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हुरियारों पर रंग डालते बरसाना के लोग
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को सुबह से ही समूची राधानगरी उत्साह और उल्लास से लबरेज दिखी। दोपहर तकरीबन दो बजे नंदगांव से हुरियारों की टोलियां आनी शुरू हो गए। हुरियारों का उत्साह और उमंग देखते ही बन रही थीं। धोती और बगलबंदी पहने हुरियारे कंधे पर ढाल रखे हुए थे। बरसाना आने के चाव में ज्यादातर हुरियारे अपने मुखिया छैल बिहारी गोस्वामी के नेतृत्व में पैदल ही ढाई कोस चले आए। नंद भवन से कान्हा की प्रतीक ध्वजा के पीछे-पीछे हुरियारे झूमते गाते चले आ रहे थे।
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राधारानी मंदिर में नंदगांव के हुरियारे
- फोटो : अमर उजाला
बरसाना में पहुंचते ही प्रिया कुंड पर हुरियारों की टोलियां एकत्र हुईं। गोस्वामी समाज के मुखिया रामभरोसे गोस्वामी के नेतृत्व में बरसाना के गोस्वामी समाज ने उनका स्वागत किया। हुरियारों को ठंडाई में केवड़ा, गुलाब जल, मेवा मिश्री भांग आदि पिलाई गई। इसके बाद पाग बंधाई कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रिया कुंड पर पाग बांधने के बाद होली की मस्ती में झूमते हुए नंदगांव के हुरियारे लाडलीजी मंदिर (राधारानी मंदिर) पहुंचे।
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राधारानी मंदिर में नंदगांव के हुरियारे
- फोटो : अमर उजाला
राधारानी मंदिर में कान्हा की प्रतीक ध्वजा को मंदिर में किशोरी जी के पास रख दिया गया। यह ध्वजा इस बात की प्रतीक है कि नटवर नंद किशोर फाग खेलने के लिए बरसाना आ चुके हैं। मंदिर में दोनों गांवों के गोस्वामियों ने समाज गायन किया। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर प्रेम भरे कटाक्ष किए। समाज गायन के बाद हुरियारे राधारानी मंदिर से बरसाना की रंगीली गली में आ पहुंचे। रंगीली गली में हुरियारिनें पहले से ही लाठियां लेकर खड़ीं थीं।
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हंसी-ठिठोली करते हुरियारे और हुरियारिन
- फोटो : अमर उजाला
बरसाना की हुरियारिनों को देखकर हुरियारों ने होली के रसिया गाने शुरू कर दिए। हुरियारिनों ने भी रसियों का जवाब रसियों से दिया। ठीक सवा पांच बजे हुरियारों को खदेड़ने के लिए एक हुरियारिन द्वारा लाठी मारी गई। जिसे हुरियारे ने अपनी ढाल पर रोक लिया। इसके बाद प्रेमपगी लाठियों की बरसात होने लगी। एक घंटे तक कस्बे की रंगीली गली, मुख्य बाजार, सुदामा चौक, बाग मोहल्ला, थाना मार्ग, कटारा हवेली अदि स्थानों पर जमकर लठामार होली खेली गई।
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हुरियारों पर लाठियां बरसातीं हुरियारिन
- फोटो : अमर उजाला
लठामार होली में हुरियारिन पूरी ताकत से लाठियों का प्रहार करती हैं। हुरियारे जिनमें तीन साल के बच्चे से लेकर अस्सी-नव्बे साल तक के बुजुर्ग तक शामिल होते हैं। सभी बड़ी ढाल से लाठियां का प्रहार रोकते हैं। इस दौरान हल्की-फुल्की चोट भी लग जाती हैं। परंपरा के अनुसार ब्रजरज को चोट पर लगा लिया जाता है। मान्यता है कि इसी ब्रजरज से घाव भर जाता है। लठामार के कारण आज तक किसी को कोई ऐसी चोट नहीं लगी कि डॉक्टर के पास जाने की नौबत आई हो।
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हुरियारों पर लाठियां बरसातीं हुरियारिन
- फोटो : अमर उजाला
देश-दुनिया में विख्यात लठामार रंगीली होली का आनंद उठाने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्त बरसाना पहुंचे। कस्बे की प्रत्येक गली श्रद्धालुओं की भीड़ से भरी नजर आई। रंगों से तरबतर श्रद्धालु जोश और मस्ती में सराबोर होकर नाचते-गाते नजर आए। श्रद्धालुओें ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।
बरसाना में लाठियां लेकर खड़ीं हुरियारिनें
- फोटो : अमर उजाला
लठामार होली की सुरक्षा व्यवस्थाओं में लगे पुलिसकर्मी वीआईपी प्वाइंट पर अफसरों की सुरक्षा में ही जमे रहे। जैसे ही लठामार शुरू हुई सारे पुलिसकर्मियों ने होली का आनंद उठाना शुरू कर दिया। जिसके कारण मेला देखने के लिए दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा।