फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मथुरा: 'जोर से लठ चलाऊंगी...पतो चल जाएगी', लठामार होली की तैयारियों में जुटीं बरसाना की हुरियारिनें

Tue, 16 Mar 2021 02:52 PM IST
मुकेश कुमार राम पंडित, अमर उजाला, बरसाना (मथुरा)।
विज्ञापन
1 of 5
बरसाना की हुरियारिनें - फोटो : अमर उजाला
मथुरा में होली की धूम हो और बरसाना की लठामार होली का जिक्र न हो तो सबकुछ अधूरा ही है। बरसाने की लठामार होली 23 मार्च को है। हुरियारिनों ने अपनी लाठियां तैयार कर ली हैं। यहां तक कि परिवार के सदस्य उनके खाने-पीने का भी विशेष ख्याल रख रहे हैं, ताकि लाठी मारने के दौरान वह थकें नहीं। जो नई बहुएं हैं, उन्हें घर की बुजुर्ग महिलाएं दांवपेंच सिखा रही हैं। बता दें कि ब्रज में हुरियारिनों को राधा का स्वरूप और हुरियारों को कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। यह उसी भाव से लठामार होली खेलते हैं और लाखों लोग इन्हें देखते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
बरसाना की लठामार होली (फाइल) - फोटो : Amar Ujala
द्वापर युगल में श्रीराधाकृष्ण ने गोपियों को राक्षसों से लड़ने के लिए नारी शक्ति का एहसास दिलाया तो वहीं मुगलों से लड़ने को ब्रज की अबला सबला नारियों को कवि भट्ट ने लठ चलाना सिखाया था। प्राचीनकाल में श्रीकृष्ण ने ब्रज गोपियों को राक्षसों से लड़ने के लिए लट्ठ चलाना सिखाया था। तभी यह होली पर यह अनूठी परंपरा चली आ रही है। देश-दुनिया में बरसाना की लठामार होली प्रसिद्ध है। 
विज्ञापन

3 of 5
बरसाना की लठामार होली के दौरान की तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
यह भी कहा जाता है कि साढे़ पांच सौ वर्ष पहले तमिलनाडु से आए श्रील नारायण भट्ट ने लठामार होली शुरू की थी। उस समय मुगलों का शासन था। मुगल शासक हिंदू नारियों का अपहरण कर लिया करते थे। इसलिए कवि भट्ट ने ब्रज की नारियों को अबला से सबला का रूप दिया और होली के माध्यम से उन्हें लट्ठ चलाना सिखाया। तब से ही बरसाना की प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन होता चला आ रहा है। 

4 of 5
बरसाना की हुरियारिन गंगा गौड़ - फोटो : अमर उजाला
बरसाना की हुरियारिन पायल गौड़ ने बताया कि वह पिछले 17 वर्ष से लठामार होली खेलतीं आ रही है। हर साल होली की प्रसिद्धि बढ़ रही है। पूरे साल इस पर्व का इंतजार किया जाता है, वो समय आने वाला है। होली पर बड़ी खुशी होती है। गंगा गौड़ ने कहा कि पहले कम लोग होली देखने के लिए यहां आते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लठामार होली पर लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। देश भर से ही नहीं बल्कि विदेशी भी होली खेलना देखने आते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बरसाना की हुरियारिन आशा गौड़ - फोटो : अमर उजाला
बरसाना की हुरियारिन आशा ने कहा कि घी, दूध और मेवा से बनाए पकवान का सेवन कर होली के लिए तैयार हो रहे हैं। हम हुरियारों से कम पड़ना नहीं चाहते। इतनी जोर की लाठी चलाऊंगी, देखने वाले देखते रह जाएंगे। राधा गौड़ ने कहा कि हमने लगातार 40 वर्ष लठामार होली खेली है। पहले भीड़ कम होती थी लेकिन अब तो लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। गलियां भीड़ से पट जाती हैं, निकलने तक का रास्ता नहीं होता है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें