सोलह श्रृंगार से सजी धजी नंदगांव की हुरियारिनें बृहस्पतिवार को घर के द्वार पर लाठियां लिए इंतजार करतीं दिखीं। वहीं, बरसाना के हुरियारे योद्धा की तरह सिर पर पगड़ी बांधे एक हाथ में लाठी और दूसरे में ढाल पकड़े भांग की मस्ती में मस्त रंगीली गली में घूम-घूम कर हंसी ठिठोली करते दिखे। बृहस्पतिवार की शाम होते ही श्रीजी के स्वरूप पताका के इशारे के साथ ही हुरियारिन बरसाना के हुरियारों पर टूट पड़ीं और लठों की बारिश शुरू कर दी। उधर, हुरियारे उन्हें अपनी ढालों पर रोकते और हंसी ठिठोली कर हुरियारिनों को उकसाते रहे। कृष्ण की क्रीड़ा स्थली नंदगांव में ऐसा ही अनुपम और अद्वितीय नजारा देखने को मिला। समाज गायन में ठाकुरजी को अनुराग युक्त गालियां सुनाई जा रहीं थीं। आवौ री सखी आवौ, बृजराज कूं गारी सुनावौ...।
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नंदगांव की लठामार होली
- फोटो : अमर उजाला
कृष्णकाल की लीला को जीवंत करने के लिए नंदगांव में गोप और गोपियां होली की तैयारियों में सुबह से ही जुट गए थे। इस दौरान घर-घर टेसू के फूलों के रंग भिगोए गए। सब घरों के आगे प्लास्टिक की बड़ी-बड़ी टंकियां मिश्रित रंगों से भरे रहे। दोपहर करीब ढाई बजे बरसाना के हुरियारे राधारानी स्वरूप पताका के साथ कुछ लोग पैदल तो कुछ वाहनों से यशोदा कुंड पहुंचे। इस दौरान पहले तो हुरियारों ने चक भांग ठंडाई छानी। इसके बाद हुरियारिनों के प्रहारों से बचने के लिए पगड़ी बांधा। इसके बाद हुरियारे भूरे का थोक होते हुए नंदबाबा के पहाड़ी स्थित भवन (नंदभवन) पर झुंडों में हंसी ठिठोली करते पहुंचे।
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नंदगांव की लठामार होली
- फोटो : अमर उजाला
नंदगांव के गोप ग्वाले यहां पहुंचने वालों हुरियारों का टेसू के फूलों के रंग से स्वागत कर रहे थे। नंदभवन में होली के पदों के साथ अबीर गुलाल हवाओं में उड़ने लगा। इंद्रधनुष के सातों रंग छाए थे और हवाओं में प्रेम का मिठास रस घुलने लगा था। सभी समाजियों के एकत्रित होने के बाद पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित नंदगांव, बरसाना के ग्वालबालों के मध्य अष्टछाप के कवियों के पदों का संयुक्त समाज गायन किया जा रहा था।
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लठामार होली चौक
- फोटो : अमर उजाला
इधर दूसरी ओर रंगीली गली और लठामार होली चौक पर हुरियारे सोलह श्रृंगार से सजी धजीं हुरियारिनों का आने का इंतजार करने लगे। इधर नंदभवन में लगभग एक घंटे तक रंगों से सराबोर होने के बाद बरसाने के हुरियारे नंदगांव की गोपियों से हंसी मजाक करते हुए रंगीली गली से निकले। गोपियों के साथ होली के रसियों का गायन कर नृत्य किया।
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नृत्य करते हुरियारे और हुरियारिनें
- फोटो : अमर उजाला
गोपियों को उकसाने के लिए हुरियारे उनको भी प्रेम पगी गालियां सुनाते हुए होली चौक पर एकत्र होने लगे। समाज का इशारा मिलते ही हुरियारिनों ने जमकर लाठियां बरसाईं और प्रेम में मगन हुरियारे उनको फूलों की टहनियों की मार खाखाकर निहाल हो रहे थे। सांझ ढलने लगी थी। समाज का आदेश हुआ कि सूर्यदेव छिप गए हैं, लठामार बंद की जाए। नंद के लाला की जय के जयघोष के बाद लठामार होली को विराम दिया गया। इस दौरान हुरियारों ने हुरियारिनों के पैर छू हंसी ठिठोली के लिए क्षमा याचना की।
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कृष्ण-बलराम के विग्रह
- फोटो : अमर उजाला
द्वापर में नंदगांव के कृष्ण जब गोपियों को बिना फगुआ (यानि होली का उपहार) दिए बगैर लौट आए तो गोपियां थोड़ी सीं नाराज हुईं। इस पर राधारानी ने सखियों को बुलाया और नंदगांव जाकर फगुआ मांगने की बात कही। इसी बहाने उन्होंने सोचा की बरसाना में कृष्ण और उनके सखाओं पर जो लाठियां बरसीं इसके बाद उनका क्या हाल.चाल है ये भी पता लग जाएगा। दशमी के दिन बरसाना से राधा के साथ गोपियों के टोल नंदभवन पहुंचे और फगुआ की मांग की। इसके बहाने एक बार फिर से नंदभवन में कान्हा और उनके सखाओं का राधा और उनकी सखियों के बीच केसर, कुमकुम जदि की होली हुई।
नंदगांव की होली के लिए प्रात: से ही हजारों भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने रंग,गुलाल,अबीर लगा, होली के रसिया गाकर कान्हा के दर्शन किए। चारों ओर रंग और गुलाल से मले हुए गुलाबी और पीले चेहरे थे तो हर तरफ राधे राधे की धुन सुनाई दी। गलियों में गुलाल और रंग की कीच जमा हो गई। श्रद्धालुओं ने इस गुलाल और रंग के मिश्रण से भी आनंद लिया।