आगरा के ताजगंज श्मशान घाट के विद्युत शवदाह गृह पर शवों के पहुंचने का सिलसिला कम नहीं हो रहा है। रविवार को शवों के अन्य दिनों के मुकाबले कम संख्या पहुंचने की जो थोड़ी राहत दिखी, वो सोमवार की सुबह तक समाप्त हो गई। सोमवार को विद्युत शवदाह गृह पर 40 शव पहुंचे। देर रात तक चिताएं जलती रहीं। इधर, आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-3 बी में बने मां कैलाश्वरी मोक्ष धाम में बड़ी संख्या में शव पहुंच रहे हैं।
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शव के अंतिम संस्कार की क्रिया करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
ताजगंज विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि दोपहर के बाद देर शाम तक शवों के पहुंचने में एकदम तेजी आई। इस कारण वेटिंग बढ़ गई। गुप्ता ने बताया कि दोपहर के बाद शवों के अंतिम संस्कार की वेटिंग एक घंटे से शुरू होकर चार घंटे तक चली।
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शव के अंतिम संस्कार की क्रिया करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
पूरे दिन शवों को लेकर एंबुलेंस शवदाह गृह पर पहुंचतीं रहीं। हर एंबुलेंस के पहुंचने के साथ ही शवों को देख दूसरे शवों के साथ आए परिजनों की वेदना और बढ़ जाती। कई दिनों से सूरज की पहली किरण के साथ ही देर रात तक विद्युत शवदाह गृह में मातमी सन्नाटा पसरा रहता है। लोगों की आंखें बार-बार आसमान की ओर देखती हैं।
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विद्युत शवदाह गृह पर जलतीं चिताएं
- फोटो : अमर उजाला
ताजगंज विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी ने बताया कि हमारी कोशिश है कि चारों भट्ठियां लगातार काम करें। हालांकि इसमें हमें बीच-बीच में दिक्कत आ रही है। देश में संक्रमण के चलते अहमदाबाद से टेक्नीशियन नहीं आ पा रहे हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर ही टेक्नीशियनों को भट्ठियों के सुचारू रूप से संचालन के लिए लगा रखा है।
कोरोना की तेज होती रफ्तार ने आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-3 बी में बने श्मशान घाट पर भी भीड़ बढ़ा दी है। कोरोना से पहले तीस दिन में लगभग तीस शव आते थे, वहीं पिछले तीन दिनों में ही 60 शवों का यहां अंतिम संस्कार हो चुका है। श्मशान घाट में लकड़ी टाल के संचालक मनोज कुमार का कहना है कि पिछले तीन दिनों में 23 अप्रैल को 25 शव, 24 अप्रैल को 28 शव और 25 अप्रैल को दोपहर तीन बजे तक 10 शवों का दाह संस्कार किया गया।