वृंदावन के ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में पारंपरिक खिचड़ी महोत्सव मंगलवार से शुरू हो गया। ठाकुर राधावल्लभ महाराज ने सुबह श्रद्धालुओं को सर्वांग वेश में दर्शन दिए। ठाकुरजी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सेवायतों ने भक्तों को खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया।
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ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में खिचड़ी महोत्सव शुरू, हजारों भक्तों ने ग्रहण किया दिव्य प्रसाद
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मंगलवार की सुबह 7.30 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले मंदिर प्रांगण ठाकुर राधावल्लभ महाराज के जयकारों से गूंज उठा। झांकी के दर्शन के समय में संप्रदायाचार्यों द्वारा रचित वाणियों का गायन भी किया गया।
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राकेश मुखिया और रवि पाठक ने खिचड़ी जुगल रुचि सौ खात, पौष शुक्ला दौज तै लै मास एक प्रभात...दही कचरी वर संधाने बरा पापर घीय, ढिग अंगीठी धरी मीठी लगत प्यारी पीय... समाज गायन किया। इस अवसर पर मंदिर सेवायत टीकैत अधिकारी राधेशलाल गोस्वामी, मोहित मराल गोस्वामी, आनंद लाल गोस्वामी, अक्षय गोस्वामी और गौरव गोस्वामी उपस्थित थे।
ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में खिचड़ी महोत्सव शुरू, हजारों भक्तों ने ग्रहण किया दिव्य प्रसाद
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- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर राधा वल्लभ मंदिर के सेवायत हित विशाल लाल गोस्वामी के अनुसार इस महोत्सव में खिचड़ी मेवा व नाना प्रकार के व्यंजनों से बनाई जाती है। यह मंगला आरती से पूर्व श्रीजी को प्रस्तुत की जाती है। रात्रि लगभग तीन बजे से ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि खिचड़ी के साथ नाना प्रकार के साग, अचार, पापड़, फल, मेवा, सुगंधित पदार्थ, केशर, कस्तूरी, अदरक आदि 32 प्रकार के पदार्थ मिलाए जाते हैं। जायफल, जावित्री, विभिन्न प्रकार के नमक, अनारदाना, छुआरे, आलू बुखारा, सूखी मेवा से यह अत्यधिक चटपटा व पाचक बनता है। दिव्य प्रसाद में कुलिया, रबड़ी की ठंड में जमी हुई व चिपिया, श्रीखंड के रूप में दही के स्वाद की व्याख्या कर पाना मुश्किल है।
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सेवायत बताते हैं कि लगभग तीन सौ वर्ष पहले कमल नयन महाराज ने खिचड़ी महोत्सव की परंपरा शुरू की थी। इसमें ठाकुरजी को पंचमेवायुक्त खिचड़ी परोसी जाती है। इसमें समाज गायन के पद के माध्यम से ठाकुर राधावल्लभ महाराज की भोग सेवा की जाती है।