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कासगंज में बाढ़ : गंगा में तेजी से हो रहा कटान, पलायन को विवश हुए ग्रामीण, देखें तस्वीरें

Fri, 12 Aug 2022 03:56 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
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बरौना गांव के पास पहुंची गंगा नदी - फोटो : अमर उजाला
कासगंज में पटियाली तहसील क्षेत्र के पांच हजार की आबादी वाले गांव बरौना के लिए गंगा का कटान  निरंतर जारी है। कटान देखकर दहशत में आए ग्रामीण लगातार गृहस्थी का सामान लेकर पलायन करने को विवश हो रहे हैं। अब उनकी आंखों में आंसू हैं और एक अजीब सा सूनापन। बदहवासी के निशान चेहरे पर साफ नजर आ रहे हैं क्योंकि कटान रोकने के सभी प्रबंध अब तक नाकाम साबित हो चुके हैं। जो सड़क गांव को कटान की जद में आने से रोक रही थी उस सड़क का 80 फीसदी हिस्सा अब तक कटान की जद में आ चुका है। 

बरौना गांव में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। दिन हो या रात प्रभावित गांव के ग्रामीण चैन से सो भी नहीं पा रहे। पूरी रात ग्रामीण गंगा की धारा के प्रवाह को देखने और उसकी रोकथाम करने में जुटे रहते हैं। जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त है। जब भी कोई पहुंचता है तो गांव की महिलाएं फफक कर रो पड़ती हैं, लेकिन किसी के पास इसका न कोई समाधान है और न ही ठोस आश्वासन। 
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कटान रोकने के लिए जद्दोजहद करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
परेशान ग्रामीण हर किसी से मदद की गुहार कर रहे हैं। लगातार बिगड़ रहे हालातों को देखते हुए और प्रशासनिक अलर्ट को देखते हुए लगातार ग्रामीण अपना सामान हटा रहे हैं। सिंचाई विभाग की टीमें भी रात में गांव में कैंप कर रही हैं। अधिकारी भी डटे हैं, लेकिन कटान रोकने में कोई कामयाबी नहीं मिल रही। 
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रात में गंगा किनारे डटे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
पूरे दिन ग्रामीण कट रही सड़क  को बचाने की कोशिश करते रहे। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि महेश कुमार ने कहा कि कैसे कटान रुकेगा कुछ समझ नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि गांव के लोग बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि गंगा की धारा का सीधा रुख गांव की ओर बना हुआ है। 

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सामान समेटते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
पूर्व सांसद एवं सपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव बरौना गांव में कटान पीड़ितों से मिलने पहुंचे। इस दौरान गांव की महिलाएं उनसे पत्थर की ठोकरें बनवाने की मांग कर बर्बादी का हवाला देकर फफक कर रो रहीं थीं। गांव बचाने के लिए महिलाएं पत्थर की ठोकरें बनवाने की मांग कर रहीं थीं। 
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सामान समेटती महिला - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण महिला मुन्नीदेवी और नन्हीं देवी ने भी कहा कि उनके घर गंगा में कट गए तो कुछ नहीं रहेगा। कैसे आगे का जीवन कटेगा। 
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