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कारगिल विजय दिवस: पाक को घुटने टेकने पर किया था मजबूर, ऐसे थे बाह के 400 सौ रणबांकुर

Wed, 22 Jul 2020 04:38 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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Kargil war - फोटो : अमर उजाला
कारगिल विजय दिवस, ये वही दिन है जब बाह के 400 रणबांकुरों ने सीमा पर अपनी बहादुरी से पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। पहले विश्व युद्ध से लेकर अब तक लड़ी गई हर जंग की यादों को समेटे बाह के रुदमुली गांव के शहीद स्मारक पर विजय दिवस का जश्न मनाया जाता है। इस दिन के याद आते ही बाह के यमुना-चंबल पट्टी के हर युवा का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
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रुदमुली में शहीद स्मारक - फोटो : अमर उजाला
कारगिल की जंग में खंडेर के जितेंद्र सिंह, कोरथ के लायक सिंह के बलिदान के अलावा बाह के 400 रणबांकुरों ने पाक को उसकी साजिश की सजा दी थी। कारगिल जंग ही नहीं यहां के वीर सपूतों ने देश की हर लड़ाई में अपनी बहादुरी की अमिट छाप छोड़ी है। रूदमुली के छह, कोरथ के सात, जवानों के अलावा उमरैठा, बासौनी, नावली, क्वारी, चांगौली आदि गांवों के 400 सपूतों ने कारगिल जंग में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया था। 

 
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आरके सिंह भदौरिया वायु सेना प्रमुख - फोटो : अमर उजाला
देश के वायुसेना प्रमुख आरके सिंह भदौरिया के गांव कोरथ की देशभक्ति आस्था से जुड़ी हुई है। जी हां, यहां के कारगिल शहीद नायब सूबेदार लायक सिंह को गांव के लोग देवता की तरह से पूजते हैं। राष्ट्रीय पर्व हो या कोई तीज त्योहार, गांव के लोग शहीद स्मारक पर जुटते हैं, प्रसाद ग्रहण करते है।

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शहीद रामवीर सिंह का स्मारक - फोटो : अमर उजाला
रुदमुली गांव का शहीद स्मारक हर जंग की गौरव गाथा को अपने आंचल में समेटे है। रूदमुली के कैप्टन निहाल सिंह, कोरथ के कैप्टन रमाशंकर सिंह, क्वारी के जितेंद्र सिंह भदौरिया ने कारगिल जंग के विजय दिवस से पहले इस गौरव गाथा को याद किया।
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कारगिल शहीद श्यामवीर सिंह की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
पहले विश्व युद्ध में 82 सपूतों ने भाग लिया। छह शहीद हुए। दूसरे विश्व युद्ध में 90 जवान शामिल हुए जिनमें चार शहीद हुए। 1947-48 के कश्मीर युद्ध में 52 जवान शामिल हुए, जिनमें से दो शहीद हो गए थे। 1962 में रघुवीर सिंह, 1965 में बृजराज सिंह, 1971 में जसकरन सिंह शहीद हुए। इस गांव के युवा सेना में जाना ही पसंद करते हैं।
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