जोंस मिल में फर्जी बैनामों के आधार पर बने मॉल, मैरिज होम, दुकान, पेट्रोल पंप व गोदाम बंद होंगे। ऐसे 139 निर्माणों पर जिला प्रशासन कब्जा लेगा। डीएम प्रभु एन सिंह के आदेश पर एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने कब्जेदारों को हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। कार्रवाई के लिए प्रस्ताव राजस्व परिषद को भेजा जाएगा।
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जोंस मिल की जगह
- फोटो : अमर उजाला
जिला प्रशासन ने जोंस मिल में जमीनों की खरीद-फरोख्त के सभी हस्तांतरण शून्य घोषित कर दिए हैं। मुन्नी लाल मेहरा, हीरालाल पाटनी और गंभीरमल पांड्या के वारिशों के खिलाफ भूमाफिया के तहत कार्रवाई की जा रही है। इन तीनों विक्रेताओं से जमीन, प्लॉट खरीदने वाले भी फंस गए हैं।
करीब 18 खसरों में राजस्व टीम ने 139 निर्माण चिह्नित किए हैं। इनमें तीन पेट्रोल पंप, दो मैरिज होम, एक बैंक, तीन कॉम्पलेक्स, तीन अपार्टमेंट और 60 से अधिक दुकानें व गोदाम शामिल हैं। बैनामे शून्य होने के बाद अब इन बैनामों के आधार पर हुए निर्माण भी ध्वस्त होंगे। इस संबंध में डीएम प्रभु एन सिंह के आदेश पर एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव और संबंधित विभाग कब्जेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार करा रही हैं।
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जोंस मिल में पड़ा मलबा
- फोटो : अमर उजाला
सरकारी जमीनों पर हुआ निर्माण
जोंस मिल में 100 बीघा जमीन राजस्व रिकार्ड में मिली है। इसमें आठ एकड़ से अधिक नजूल व राजकीय संपत्ति है। जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक भूमाफिया ने जोंस मिल में पट्टे की जमीन के साथ सरकारी जमीन भी बेच दी। जो निर्माण हुए उनके सरकारी भूमि पर होने की आशंका है। ऐसे में एक तरफ इन निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई होगी दूसरी तरफ प्रशासन सरकारी संपत्तियों को पुराने स्वरूप में वापस लाने के लिए कवायद करेगा।
जोंस मिल के इस हिस्से में हुआ था ब्लास्ट
- फोटो : अमर उजाला
शपथ पत्र के साथ देना होगा प्रत्यावेदन
जोंस मिल जमीनों को लेकर आरोपित पक्षों को सुनवाई के लिए प्रशासन ने एक और मौका दिया है। डीएम ने एडीएम प्रोटोकॉल पुष्पराज सिंह की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। जो आरोपितों के प्रत्यावेदन को जांच व सुनवाई के बाद निस्तारित करेगी। एडीएम प्रोटोकॉल ने बताया कि तीन दिन में कोई प्रत्यावेदन प्राप्त नहीं हुआ। प्रत्यावेदन करने वाले को अपनी बात स्टांप पेपर पर शपथ पत्र के साथ लिखकर देनी होगी।