मथुरा के नंदगांव में बुधवार को श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नंदभवन में परंपरागत तरीके से मनाया गया। नंदीश्वर पर्वत स्थित नंदबाबा मंदिर में नंद महोत्सव के अवसर पर नंदगांव-बरसाना के गोस्वामी समाज के बधाई गायन ने द्वापर युग की कथा को एक बार फिर जीवंत कर दिया। इस दौरान नंद भवन में दधि कांधो, मल्ल युद्ध, बांस बधाई, भांड लीला, शंकर लीला आदि का मंचन किया गया।
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नंदमहल में श्रीकृष्ण और बलराम के साथ यशोदा मइया और नंदबाबा के विग्रह
- फोटो : अमर उजाला
कान्हा के जन्मोत्सव पर 56 भोग का आयोजन किया गया। कृष्ण-बलराम स्वर्ण रजत पालने में विराजे। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित हो माथे को केसर कुमकुम आदि के चंदन से सजा कर समाजी नंदभवन पहुंचे। कान्हा और बलराम के चरणों में वंदन कर नंद महोत्सव की तैयारियों में जुट गए।
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नंदमहल में हुआ समाज गायन
- फोटो : अमर उजाला
नंदभवन के द्वारों पर फूल और पत्तियों से बने बंदनवार बांधे गए। बरसाना से आए समाजियों का दान बिहारी चौधरी ने स्वागत किया। उपहार स्वरूप भगवान का लड्डू प्रसाद दिया। 10 बजे नंदगांव-बरसाना के विप्रों ने सामूहिक समाज गायन किया गया। नटखट गोपाल के लिए नंदगांव-बरसाना के गोपों ने समाज गायन कर दीर्घायु की कामना की।
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नंदभवन में लीला मंचन
- फोटो : अमर उजाला
समाज गायन के दौरान ‘हे हा हे...’ की ध्वनि वहां मौजूद लोगों को रिझा रही थी। समाज गायन के दौरान ‘रानी तेरौ चिर जीवै गोपाल, आजु बधायौ ब्रजराज के, बाजै बधाइयां बे सेइयां नंद के दरबार’ आदि पदों का गायन किया गया। नंदगांव वासियों ने ‘वृषभान के जमाई की जै’ और बरसाना के लोगों द्वारा ‘नंद के जमाई की जै’ के जयघोष गूंजते रहे। इस अवसर पर मिठाई, खिलौने, पटुका, फरुआ आदि लुटाए गए। मंदिर प्रांगण में ही प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध का प्रदर्शन किया।
कृष्ण कालीन लीलाओं का मंचन किया गया। श्रीकृष्ण के जन्म की खबर सुनते ही देवता भी दर्शनों को लालायित होने लगे। स्वर्ग से देवता किसी न किसी रूप में बाल कृष्ण के दर्शनों को आने लगे। जगत पिता ब्रह्मा और ब्रह्माणी भी ढांढ़ी-ढांढ़िन का वेष रख कर भगवान के दर्शनों के लिए आए। नंदभवन में पहुंच कर नंदबाबा को उसकी वंशावली का वर्णन किया। बांस बधाई भी हुई। शंकर लीला का मंचन हुआ। कोरोना के चलते इस बार दंगल नहीं हुआ।