स्मारकों के संरक्षण की आड़ में इनके मूलस्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। आगरा किले के जहांगीरी महल और हाईवे स्थित सादिक खां के मकबरे को सफेद रंग के मिश्रण से ढंक दिया गया है। इससे मूलस्वरूप ही नजर नहीं आ रहा, पच्चीकारी छिप गई है।
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आगरा किला
- फोटो : अमर उजाला
स्मारक इतिहास के साक्ष्यों के गवाह होते हैं। इनकी पच्चीकारी, कला आदि से उस काल के बारे में कई जानकारियां मिलती हैं। इसलिए स्मारकों के संरक्षण के दौरान इनके मूलस्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की जाती। जहांगीरी महल और सादिक खां के मकबरे के मामले में ऐसा नहीं हुआ। जहांगीरी महल में छत पर लाल पत्थर पर उकेरी गई बारीक और खूबसूरत पच्चीकारी को सफेद रंग के मिश्रण से दबा दिया गया है। कई जगह से यह सफेद मिश्रण अपनी जगह छोड़ गया, तब इसका मूलस्वरूप सामने आया।
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सादिक खां-सलावत खां की बारहदरी
- फोटो : अमर उजाला
हाईवे स्थित गैलाना रोड के पास बने सादिक खां के मकबरे को तो पूरी तरह से ही सफेद रंग के मिश्रण से ढंक दिया। यह कार्य काफी पुराना है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी इसका पुराना रिकार्ड खंगाल रहे हैं लेकिन अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ है। इस स्मारक की स्थिति यह है कि इस पर तो कई जगह सीमेंट से भी संरक्षण कार्य कराए गए हैं। इसका मूलस्वरूप ही गायब हो गया है।
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आगरा किला
- फोटो : अमर उजाला
स्मारकों के मूलस्वरूप के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। जो पत्थर जर्जर हो गया है या टूट गया है, उसी तरह के नये पत्थर पर उसी तरह की पच्चीकारी करके लगाया जाता है। जरूरत पड़ने पर लाइम पनिंग (मार्बल पाउडर, चूना पत्थर के मिश्रण से पुताई) की जा सकती है। चिकनाई के लिए दही, अंडा, बताशा, नारियल और साबुन के चूरे के मिश्रण से फिलिंग की जाती है।
आगरा किला के वरिष्ठ संरक्षण सहायक अमरनाथ गुप्ता का कहना है कि ये काम मेरे कार्यकाल में नहीं हुआ है। पूर्व में किसी ने कराया होगा। संरक्षण कार्य के दौरान पुराने स्ट्रक्चर में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। इसलिए हमने इसमें बदलाव नहीं किया। -