वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में टैक्स की दरों पर पहले से असंतोष व्यक्त कर रहे आगरा के व्यापारियों ने जीएसटी के जन्म के पहले दिन ही उसे मृत बता दिया। इतना ही नहीं व्यापारियों ने शनिवार को सुबह ही जीएसटी और भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली की प्रतीकात्मक अर्थी सजाई और फिर शवयात्रा निकालकर विरोध जताया। हालांकि पुलिस ने व्यापारियों के मंसूबे कामयाब नहीं होने दिए।
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जीएसटी
- फोटो : अमर उजाला
शवयात्रा लेकर श्मसान घाट की ओर बढ़ रहे व्यापारियों को पुलिस ने बेलनगंज में ही रोक लिया। इस दौरान पुलिस और व्यापारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई लेकिन पुलिस ने व्यापारियों को आगे नहीं बढ़ने दिया इसके बाद उन्होंने बेलनगंज में ही प्रतीकात्मक अर्थियों को आग लगा दी। इस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों को हिरासत में ले लिया।
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बता दें कि आगरा के कारोबारियों ने एलान किया था कि शनिवार की सुबह बेलनगंज चौराहे से वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की शवयात्रा निकालकर ताजगंज शमशान घाट पर इसका अंतिम संस्कार करेंगे। शनिवार को शुरूआत भी ऐसे ही हुई। विरोध प्रदर्शन करने के लिए कपड़ा, जूता, हैंडीक्राफ्ट, सराफ समेत सभी ट्रेडों के व्यापारी बेलनगंज पहुंचे।
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यहां व्यापारियों ने कहा कि कहना है कि सरकार के बिना विश्वास में लिए काला कानून कतई स्वीकार नहीं है। व्यापारी इसकी विसंगतियों और कई नीतियों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इधर शनिवार को भी जीएसटी के विरोध में आगरा के हैंडीक्राफ्ट कारोबारी और कपड़ा व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
व्यापारी जीएसटी को लेकर अपना विरोध जताने के लिए शनिवार को आगरा के विकास भवन पहुंच गए। यहां डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा को मंडलीय समीक्षा बैठक के लिए आना था। ऐसे में व्यापारी डिप्टी सीएम से मिलनी की मांग करते रहे। हालांकि पुलिस ने व्यापारियों को रोकने के लिए काफी इंतजाम कर रखे थे। इसका कारण समीक्षा बैठक से पहले उनकी डिप्टी सीएम से मुलाकात नहीं हो सकी। पुलिस ने व्यापारियों को गिरफ्तार कर लिया।