समाजवादी पार्टी ने ताजनगरी में राष्ट्रीय अधिवेशन कर विरोधी खेमों में हलचल बढ़ा दी है। भाजपा के गढ़ में राष्ट्रीय स्तर का आयोजन कर उसे सीधी चुनौती दी है। वहीं, बसपा में सेंधमारी का सिलसिला छेड़ दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने तीन दिन शहर में रहकर न सिर्फ कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार किया बल्कि यहां की नब्ज भी टटोली।
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समाजवादी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
लंबे समय बाद ताजनगरी सपा के रंग में रंगी नजर आई। आयोजन स्थल के आसपास के क्षेत्र को पार्टी की झंडी और होर्डिंगों से पाट दिया गया। शहर में भी तमाम जगहों पर सजावट कर सपा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अधिवेशन में 25 राज्यों के 15 हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने शिरकत की, सभी होटल फुल रहे। लोगों को लगा कि शहर में कोई जलसा है।
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समाजवादी पार्टी
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भव्य स्तर पर की गई तैयारियों ने भाजपा-बसपा नेताओं की नींद उड़ा दी। खासतौर से भाजपाइयों में हलचल तेज रही, क्योंकि यह भाजपा का गढ़ है। पार्षद, महापौर से लेकर विधायक और सांसद तक के चुनाव में भाजपा का ही वर्चस्व रहता है।
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bjp meeting
ऐसे में भाजपा के गढ़ में राष्ट्रीय अधिवेशन कर सपा ने उसे सीधी चुनौती दी है। भाजपाई आलाकमान की नजरें भी ताजनगरी पर ही रहीं। प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ संगठन के लोगों से भी लगातार इस अधिवेशन के इंपैक्ट रिपोर्ट लेते रहे।
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अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
इधर, सपा ने इस अधिवेशन के बाद से बसपा में सेंधमारी शुरू कर दी है। अधिवेशन के तुरंत बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा के पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा के घर पहुंचकर उन्हें साइकिल पर सवार किया। सूत्रों की मानें तो कई और पूर्व विधायक सपा के संपर्क में आ गए हैं। आने वाले दिनों में लखनऊ में इनकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।
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अखिलेश यादव
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जानकारों का कहना है कि इस अधिवेशन के बाद से ताजनगरी में सपा की स्थिति काफी मजबूत होगी। अखिलेश यादव ने भी इसके लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। वह चार अक्तूबर को ही आ पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पार्टी के तमाम नेताओं के साथ मुलाकात की।
पांच अक्तूबर को अधिवेशन के बाद भी वह कई नेताओं के यहां चाय और भोजन पर गए। शुक्रवार को लखनऊ जाने से पहले भी उन्होंने शहर के कुछ लोगों के साथ वक्त गुजारा। तीन दिन के अखिलेश के इस दौरे पर भाजपाई भी नजर गढ़ाए बैठे रहे।