फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस दरगाह पर पहुंचीं फिल्म अभिनेत्री ऋषिता भट्ट, अमन चैन की मांगी दुआ, जानिए दरगाह की खासियत

Thu, 02 May 2019 09:31 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 5
फिल्म अभिनेत्री ऋषिता भट्ट - फोटो : अमर उजाला
दरगाह मरकज साबरी में केसरिया टोपी, साफा और जुब्बा पहनकर लोग सजदा करते हैं। ये दरगाह पिछले कई सौ सालों से सद्भावना की मिसाल दे रही है। बुधवार को हज़रत ख्वाजा शेख़ सय्यद फतिहउद्दीन बल्खी अलमारूफ़ ताराशाह चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह अलैह के 420 वें सालाना पांच दिवसीय जश्न-ए-उर्स व सर्वधर्म सम्मेलन के चौथे दिन मज़ार शरीफ पर चादरपोशी करने के हुजूम उमड़ पड़ा। 
विज्ञापन

2 of 5
दरगाह मरकज साबरी पहुंचीं अभिनेत्री ऋषिता भट्ट - फोटो : अमर उजाला
दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन मेहबूब-ए-इलाही के दरबार के गद्दीनशीन सय्यद मूसा निज़ामी ने अपने खादिमों सुशील गुप्ता, जगमोहन मदान के द्वारा भेजी चादर शरीफ भी दरबार मे पेश की गई। मुम्बई से आई अभिनेत्री ऋषिता भट्ट ने चादरपोशी करके दरबार मे अमन चैन की दुआ की।
विज्ञापन

3 of 5
आगरा क्लब स्थित दरगाह मरकज साबरी - फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर उर्स में शिरकत करने आये विशिष्ट अतिथियों की दस्तार बन्दी की गई। कव्वाली का आयोजन हुआ जिसमें सभी ने लुत्फ उठाया और अपनी इल्तजा बारगाह में पेश की। साबरी परिवार का झंडारोहण सज्जादानशीं आले पंजतनी पीर अलहाज रमज़ान अली शाह ने करते हुए सभी जायरीन व मुरीदीन के लिए खास दुआ की। 
 

4 of 5
दरगाह मरकज साबरी पहुंचीं अभिनेत्री ऋषिता भट्ट
आगरा क्लब में दरगाह मरकज साबरी है। चार सौ से अधिक साल पुरानी इस दरगाह की अपनी अलग ही कहानी है। इस दरगाह के सज्जादानशीं रमजान अली शाह (सरकार) हैं। दरगाह पर इस बार 420वे उर्स का आयोजन हुआ। इस दरगाह पर नेता से लेकर अभिनेता माथा टेकने आते हैं। पूर्व सांसद राजेश पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा या फिर फिल्म अभिनेत्री ऋषिता भट्ट, सभी ने मजार पर माथ टेका है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
दरगाह मरकज साबरी - फोटो : अमर उजाला
दरगाह मरकज साबरी की मान्यता है कि यहां हाथ फैलाकर जिसने भी मन्नत मांगी, उसकी हर तमन्ना पूरी हुई है। दरगाह पर केसरिया लिवास पहनकर सजदा करने की परम्परा देश में सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दे रही है। देशभर के जायरीन यहां अपनी मन्नतों को पूरा करने के लिए धागा बांधते हैं। केसरिया टोपी पहनने पर जायरीनों का मानना है कि उनके पीर इस रंग की टापी (ताज-ए-साबरी) पहनते थे तो उनकी पसंद पूरी करने के लिए केसरिया टोपी, जुब्बा और साफा पहना जाता है। 

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें