आगरा में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सरकारी दफ्तरों को सैनेटाइज करता देख लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है क्या घर और निजी दफ्तरों को भी इसी तरह सैनेटाइज किया जा सकता है? स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह काम मुश्किल नहीं है। जैसे घर की सफाई फिनाइल से होती है, वैसे ही कार्बोलिक एसिड और सोडियम हाइपो क्लोराइड से की जाए तो इसी से सैनेटाइज हो जाता है।
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बाथरूम को सैनेटाइज करता कर्मचारी
- फोटो : Amar Ujala
एसएसपी दफ्तर में आई टीम से अमर उजाला ने इस संबंध में बात की। टीम के इंचार्ज राकेश चौधरी ने बताया कि दोनों केमिकल सर्जिकल आइटम की दुकानों पर मिल रहे हैं। इनकी कीमत भी लगभग फिनाइल के बराबर ही है। इनसे विसंक्रमण (सैनेटाइजेशन) लगभग पूरे दिन के लिए हो जाता है। इसकी विधि भी मुश्किल नहीं है। टीम जिन दफ्तरों में जा रही है, उसके सफाई कर्मचारियों को विधि समझाई जा रही है।
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सोडियम हाइपक्लोराइट
- फोटो : Amar Ujala
सोडियम हाइपो क्लोराइड से पौंछा लगाए
स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि घर और दफ्तर में फिनाइल आदि को पानी में डालकर पौंछा लगाया जाता है। फर्श सैनेटाइज करने के लिए सोडियम हाइपो क्लोराइड लें। इसकी जितनी मात्रा ले रहे हैं, उसका चार गुना पानी लें। मसलन, एक गिलास केमिकल है तो चार गिलास पानी। इन्हें मिलाकर पौंछा लगा दें।
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दफ्तर
- फोटो : Amar Ujala
छूने वाली जगहों को कार्बोलिक एसिड के साथ साफ करें
फर्नीचर, दरवाजे, खिड़की आदि को हम दिन में कई बार छूते हैं। इन्हें कार्बोलिक एसिड से सैनेटाइज किया जाना चाहिए। इस एसिड में तीन गुना पानी डाल लें। मसलन एक गिलास एसिड तो तीन गिलास पानी। इस मिश्रण से छूने वाली जगहों को साफ करें। इसी से विसंक्रमण हो जाएगा। सरकारी दफ्तरों में छूने वाली जगहों पर इसका स्प्रे किया जा रहा है। अगर स्प्रे मशीन नहीं है तो कपड़े को केमिकल से भिगोकर सफाई की जा सकती है।
कोरोना वायरस संक्रमित यात्री के गतिमान एक्सप्रेस से दिल्ली से आगरा आने के मामले के बाद रेलवे ने मंगलवार से एहतियाती उपाय अपनाने शुरू कर दिए। मंगलवार को आगरा मंडल में ट्रेनों के अनारक्षित कोच के प्रवेश द्वार के हैंडल, टॉयलेट नल और सीट के पास कीटाणुनाशक का प्रयोग कर सफाई की गई और सैनेटाइज किया गया। वहीं कैंट स्टेशन पर प्रवेश और निकास द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग के लिए काउंटर बनाया गया है।