फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटी जड़ रही थी छक्के-चौके, तब मां कर रही थी घरों में बर्तन साफ, भावुक कर देगी एक 'कप्तान' की कहानी

Sun, 24 Nov 2019 04:21 PM IST
Abhishek Saxena सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 6
अंडर-19 वर्ग में आगरा की कप्तान पूजा राजपूत का परिवार - फोटो : अमर उजाला
जिस समय अंडर-19 वर्ग में आगरा की कप्तान पूजा राजपूत आरबीएस इंटर कॉलेज मैदान में चौके-छक्के लगा रहीं थीं, उस समय उनकी मां हरप्यारी लोगों के घरों के बर्तन साफ कर रही थीं। उनके सामने चलते कैमरे ने उन्हें यह एहसास तो करा दिया कि उनकी बेटी ने खेल के मैदान में कुछ नया कर दिया है। उनको बताया गया कि उनकी बेटी पूजा के शानदार प्रदर्शन की बदौलत आगरा मंडल की टीम 65वीं माध्यमिक स्टेट क्रिकेट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंची है। 
विज्ञापन

2 of 6
अंडर-19 वर्ग में आगरा की कप्तान पूजा राजपूत की मां हरप्यारी - फोटो : अमर उजाला
पूजा के पिता कोमल सिंह काफी समय से पेरेलेटिक अटैक होने से कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए मां हरप्यारी घर-घर जाकर काम करती हैं, ताकि घर की व्यवस्था और पूजा का क्रिकेट चलता रहे। कई बार पूजा को एकेडमी जाने में परेशानी होती है, तो उनकी मां उनकी परेशानी को दूर करती हैं। 
विज्ञापन

3 of 6
अंडर-19 वर्ग में आगरा की कप्तान पूजा राजपूत, मां हरप्यारी - फोटो : अमर उजाला
पूजा का कहना है कि मैदान में मां का स्मरण करते हुए ही प्रवेश करती हूं। क्रिकेट को इसलिए कॅरियर बनाया क्योंकि क्रिकेट में शोहरत और दौलत दोनों हैं। मैं चाहती हूं कि इस खेल में मैं इतना आगे जाऊं, जिससे मेरी मां ही नहीं, किसी और की मां को भी कभी बर्तन साफ नहीं करने पड़ें। मैंने सोच रखा है कि जिंदगी की पिच से गरीबी का विकेट उखाड़ना है।

4 of 6
अंडर-19 वर्ग में आगरा की कप्तान पूजा - फोटो : अमर उजाला
जीडी गोयंका स्कूल के प्रधानाचार्य पुनीत वशिष्ठ का कहना है एकेडमी ने पूजा की प्रतिभा का आंकलन तीन साल पहले ही कर लिया था। तीन साल पहले जिस समय पूजा उनसे मिलीं, तो उस समय एक खिलाड़ी को खेल के लिए जितनी जरूरत हो सकती है, सभी सुविधाएं दी गईं। इसके बाद उन्होंने लगातार प्रेक्टिस करना शुरू कर दिया। उन्होंने पूजा को कभी भी नैट से दूर नहीं देखा है।
विज्ञापन

5 of 6
पूजा के पिता कोमल सिंह - फोटो : अमर उजाला
मेरी बेटी मैदान में जैसा अच्छा कर रही है, वैसा करती रहे। मेरी कोशिश रहती है कि उसका खेल लगातार चलना चाहिए। यह कहना है पूजा की मां हरप्यारी का। हरप्यारी बताती हैं कि पूजा को क्रिकेट का शुरू से ही शौक है। गांव में टेनिस की गेंद से क्रिकेट खेलती थीं। पूजा के पिता को पेरेलेटिक अटैक हो गया। इसके बाद स्थिति काफी विपरीत हो गईं। काफी समय बाद अच्छा लगता है जब सुनती हूं कि पूजा ने रन बनाए।  
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
क्रिकेट के मैदान में पसीना बहा रहीं बेटियां - फोटो : अमर उजाला
पूजा में काफी संभावनाएं हैं। यहां शानदार प्रदर्शन करने से पहले पिछले साल नागपुर में बोर्ड ट्रॉफी में भी अच्छा प्रदर्शन किया था। यह कहना है कोच संतोष शर्मा का। संतोष ने बताया कि पूजा की सबसे बड़ी ताकत उनकी एकाग्रता और धैर्य है। छुट्टी के दौरान पूजा अकेले ही नेट पर अभ्यास करने पहुंच जाती हैं।  प्रेक्टिस में कोई कसर नहीं छोड़तीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें