देश और दुनिया में मशहूर ब्रज की होली के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मथुरा के कई इलाकों में बड़ी मात्रा में अबीर-गुलाल बनाया जा रहा है। मथुरा में बना अबीर गुलाल देश भर में भेजा जाएगा। जिससे इस त्योहार को मस्ती के साथ मनाया जाए, वहीं लठामार होली के लिए बरसाना के लाडली जी मंदिर के सेवायतों द्वारा टेसू के फूलों से प्राकृतिक रंग बनाया जा रहा है।
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मथुरा में बनाया जा रहा गुलाल
मथुरा में होली का त्योहार बड़े जोरशोर से मनाया जाता है। यहां की लठामार होली भारत ही नहीं बल्कि दुनिया में मशहूर है। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी यहां की होली का आनंद लेने के लिए ब्रज के मथुरा नगरी की ओर रुख करते हैं। ब्रज के प्रमुख मंदिरों में भारी मात्रा में गुलाल उड़ाया जाता है। पूरा ब्रज इस उत्सव में एक माह तक सराबोर रहता है।
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मथुरा में बनाया जा रहा गुलाल
होली के त्योहार को खास बनाने के लिए मथुरा की कई फैक्टरी में गुलाल बनाया जा रहा है। ब्रज की होली में बड़ा तादाद में अबीर-गुलाल का इस्तेमाल होता है, वहीं यहां बने गुलाल की पवित्रता भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यही कारण है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी यहां का बना गुलाल अपनी रंगीनियत बिखेरेगा।
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मथुरा में बनाया जा रहा गुलाल
मथुरा के नेशनल हाइवे स्थित राधावैली के समीप, चैतन्य बिहारी कालोनी, गांव तेहरा आदि क्षेत्रों में बड़ी तादाद में होली के लिए अबीर और गुलाल बनाया जा रहा है। मथुरा जिले में बना अबीर-गुलाल देश भर में भेजा जाएगा।
लाडली जी मंदिर में टेसू के फूलों से बनाया जा रहा प्राकृतिक रंग
नंदगांव के हुरियारों पर एक ओर जहां बरसाना की हुरियारिन प्रेमपगी लाठियां बरसाने को आतुर हैं तो वहीं उन्हें रंग में सराबोर करने के लिए मंदिर सेवायतों द्वारा लाडली जी मंदिर में टेसू के फूलों से प्राकृतिक रंग बनाया जा रहा है। बड़ी कढ़ाई में सूखे टेसू के फूलों को डालकर उसे उबालकर रंग तैयार हो रहा है। भगवानदास भंडारी ने बताया कि दिल्ली और बनारस से करीब पांच कुंतल टेसू के सूखे फूल मंगाए गए है। वहीं श्रद्धालुओं पर बरसाने के लिए हाथरस से करीब 10 कुंतल गुलाल मंगाया गया है।