सूरजपाल से भोले बाबा बनने का सफर ज्यादा पुराना नहीं है। महज ढाई दशक में ही आध्यात्म के बहाने चमत्कार की यात्रा ने लाखों भक्तों के बीच भगवान विष्णु का स्वरूप बना दिया। भोले बाबा ने अपना पहला आश्रम अपने जन्म स्थान के गांव बहादुर नगर पटियाली में वर्ष 1999 में बनाया। यह आश्रम इतना विशाल और बड़ा बनाया कि इसमें हजारों भक्तों के रुकने और सत्संग में शामिल होने के इंतजाम हैं।
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नारायण साकार हरि भोले बाबा
- फोटो : संवाद
अब तो भोलेबाबा के मैनपुरी, राजस्थान, मध्यप्रदेश व अन्य स्थानों पर आश्रम बने हुए हैं। सेवादार भक्तों ने इन आश्रमों को भव्यता दी है। जहां बाबा सत्संग भी करते हैं और उनका प्रवास रहता है। बाबा तीन भाई और तीन बहने हैं।
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साकार हरि बाबा
- फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
बाबा के बड़े भाई भगवानदास की वर्ष 2016 में मौत हो चुकी है, जबकि छोटा भाई राकेश गांव में प्रधान रह चुका है। वह बाबा के साथ ही रहता है। बाबा ने अपने घर, मकान, आश्रम का एक ट्रस्ट बना दिया है।
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साकार हरि बाबा
- फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
पिछले वर्ष ही पटियाली के रजिस्ट्री ऑफिस में इस ट्रस्ट से जुड़ी कुछ रजिस्ट्रियां हुईं और वह कुछ देर के लिए पटियाली पहुंचे। सेवादार राजपाल सिंह बताते हैं कि भोले बाबा पटियाली के आश्रम पर करीब 12 वर्षों से नहीं आए थे।
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साकार हरि बाबा
- फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
पिछले वर्ष ही वह रजिस्ट्री के कार्य से कुछ देर के लिए यहां पहुंचे। बाबा ने श्रीनारायण साकार हरि चैरिटेबल ट्रस्ट बना रखा है। पहले बाबा मानव सेवा आश्रम के रूप में ट्रस्ट चलाते थे, लेकिन वर्ष 2023 में इसमें बदलाव कर दिया।
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साकार हरि बाबा
- फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
जिले की पुलिस की जांच पड़ताल के मुताबिक बाबा की तैनाती पहले सिविल पुलिस में सिपाही के रूप में थी और वह इटावा में तैनात रहे। इसके बाद वह एलआईयू में चले गए और आगरा में तैनाती के दौरान उन्होंने नौकरी छोड़ दी। भोले बाबा के भक्तों में उनके प्रति इतनी अटूट आस्था है कि वह आश्रम से मिट्टी और पानी को अपने घर पर प्रसाद के रूप में ले जाते हैं।
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साकार हरि बाबा
- फोटो : अमर उजाला
लोग आश्रम की मिट्टी को सोना और पानी को अमृत मानते हैं। यह सिलसिला आज भी जारी है। एएसपी राजेश कुमार भारती बताते हैं कि बाबा के बारे में अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि उन्होंने नौकरी छोड़ी या उन्हें बर्खास्त किया गया।
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भोले बाबा की बहन सोनकली
- फोटो : अमर उजाला
बहन बोली, बाबा पर थी सिद्धि, करते थे चमत्कार
बहादुर नगर में रहने वाली बाबा की वृद्ध बहन सोनकली का कहना है कि जब वह नौकरी करते थे उसी दौरान उन्हें कुछ सिद्धि हो गई और सिद्धि के दौरान वह पागल से हो गए। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और सिद्धि में लग गए।
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Hathras Stampede
- फोटो : अमर उजाला
वह चमत्कारिक रूप से अंगुली पर चक्र चलाते थे। बाबा के पास चमत्कार थे, इसी वजह से दुनिया भर से लोग उनके पास आते थे और लोगों का भला होता था। उनके भक्त आज भी मिट्टी और पानी ले जाते हैं। आज का पढ़ा लिखा समाज है। यदि उसे कुछ लाभ नहीं मिलेगा तो वह क्यूं आएगा।
भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की हुई मौत
हाथरस के सिकंदराराऊ में हुई भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जिनमें से 106 की पहचान यूपी के 17 जिलों के निवासियों के रूप में हुई है, जबकि छह देश के अलग अलग राज्यों के निवासी हैं। बाकी की पहचान के प्रयास जारी हैं।