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Hathras Tragedy: इस सरकार में लाल बत्ती कार में चलता था काफिला... निजी कमांडो के कड़े पहरे में रहता है बाबा

Wed, 03 Jul 2024 02:54 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
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Baba Narayan Sakar - फोटो : अमर उजाला
हाथरस के सिकंदराराऊ के नेशनल हाईवे स्थित गांव फुलरई मुगलगढ़ी के सहारे खेतों में आयोजित नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग के समापन के बाद मची भगदड़ में करीब 121 लोगों की मौत हो गई।

मंगलवार दोपहर यह हादसा उस समय हआ, जब भोले बाबा के काफिले के निकलते समय उनकी चरण धूल लेने के लिए अनुयायियों में अफरा-तफरी मच गई। भगदड़ के बीच हाईवे के सहारे के कीचड़युक्त खेत में तमाम लोग गिर गए और उनके ऊपर से भीड़ गुजर गई।

हादसे के बाद मची चीख पुकार के बीच अफरा-तफरी भरे माहौल में शवों व घायलों को सिकंदराराऊ के ट्रामा सेंटर और एटा के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। मरने वालों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। मरने वालों में चार की पहचान हुई है। 

बताया जाता है कि नारायण साकार हरि यानी भोले बाबा का बसपा सरकार में डंका बजता था। इस सरकार में भोले बाबा लाल बत्ती की गाड़ी में सत्संग स्थल तक पहुंचते थे। उनकी कार के आगे आगे पुलिस एस्कॉर्ट करते हुए चलती थी। बसपा सरकार में तत्कालीन जनप्रतिनिधि उनके सत्संग में शामिल होने पहुंचते रहे। सत्संग स्थल पर पुलिस की जगह उनके स्वयंसेवक ही कमान संभालते हैं। 
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साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
सत्संग में सेवा के लिए पुलिसकर्मी भी छुट्टी लेकर पहुंचते हैं। सत्संग में पूरी व्यवस्थाएं स्वयंसेवकों के हाथ में ही होती हैं। इनमें कई पुलिसकर्मी हैं, जो बाबा की सुरक्षा में तैनात रहने के साथ सत्संग स्थल पर व्यवसथाएं संभालते हैं। 

 
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साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
स्वयंसेवक गुलाबी रंग की यूनिफॉर्म में सत्संग स्थल से लेकर शहर की सड़कों पर तैनात रहते हैं। आगरा में कोठी मीना बाजार मैदान, सेवला के पास शक्ति नगर मैदान, आवास विकास कॉलोनी, दयालबाग, बाह और शास्त्रीपुरम के पास सुनारी में नारायण साकार हरि का सत्संग हो चुका है।

 

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साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
सूरजपाल सिंह उर्फ साकार हरि बाबा उर्फ भोले बाबा कासगंज जिले के पटयाली का रहने वाला है। 17 साल पहले पुलिस कांस्टेबल की नौकरी छोड़ सूरजपाल सत्संग करने लगा। वह आम साधु-संतों की तरह गेरुआ वस्त्र नहीं पहनता। अधिकतर वह महंगे चश्मे, सफेद पैंट-शर्ट पहनता है।
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साकार हरि बाबा - फोटो : अमर उजाला
गरीब और वंचित तबके के लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में उसके लाखों अनुयायी हैं। बाबा ने अपने पैतृक गांव बहादुरनगर में बड़ा आश्रम बना रखा है, जहां हर महीने के पहले मंगलवार को सत्संग होता है। 


 
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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
बाबा आश्रम में हो या न हो, भक्तों का हुजूम लगा रहता है। पुलिस पृष्ठभूमि के चलते बाबा पुलिस के तौर-तरीकों को जानता है। इसी से उसने वर्दीधारी स्वयंसेकों की लंबी-चौड़ी फौज खड़ी कर दी। 

 
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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
जिन भोले बाबा साकार विश्व हरि का यह सत्संग था, वह 27 साल पहले अभिसूचना इकाई (एलआईयू) में हेड कांस्टेबल पद पर थे। उनका असली नाम सूरजपाल सिंह है। एलआईयू की नौकरी से वर्ष 1997 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और 1999 में गांव के घर को आश्रम का रूप देकर सत्संग शुरू कर दिया। 25 साल में वह सूरज पाल से भोलेबाबा बन गए।

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
पटियाली क्षेत्र के बहादुर नगर निवासी सूरजपाल सिंह की अभिसूचना विभाग में सिपाही के रूप में तैनाती हुई। इसके बाद वह हेड कांस्टेबल पद पर प्रोन्नत हुए और उन्होंने हेड कांस्टेबल पद पर रहते हुए वर्ष 1997 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। सत्संग प्रवचन शुरू होने के साथ ही सूरजपाल को भोले बाबा के रूप में पहचान मिली तो उनकी पत्नी को माताश्री के रूप में पहचान मिली।

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
इनके कोई संतान नहीं है। 1997 के बाद से शुरू हुई भोले बाबा की आध्यात्मिक यात्रा का प्रचार-प्रसार तेजी से हुआ। उनके अनुयायियों का कारवां बढ़ता चला गया और ढाई दशक में हजारों लोग उनके सत्संग में पहुंचने लगे। पटियाली के निवासी भोले बाबा के अनुयायी आगरा, एटा, कासगंज, हाथरस, अलीगढ़, मथुरा, फिरोजाबाद, बदायूं, फर्रुखाबाद में तो हैं ही, उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश में भी उनके अनुयायी बन गए। उनके अनुयायियों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
16 निजी कमांडो के कड़े पहरे के बीच पहुंचा था भोले बाबा
भोले बाबा 16 कमांडो के कड़े पहरे के बीच कार्यक्रम स्थल पर पौने 12 बजे पहुंचा था। वह सीधे मंच पर गया और अपना उद्बोधन शुरू कर दिया। पौने दो बजे तक प्रवचन किए। दो बजे आरती खत्म होने के साथ ही कार्यक्रम के समापन की घोषणा कर दी गई। इसके बाद भीड़ यहां से जाने लगी। पांच मिनट बाद ही भगदड़ मच गई थी।

 

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
इस कार्यक्रम की अनुमति फुलरई गांव निवासी वेदप्रकाश ने ली थी। अनुमति के लिए जो आवेदन किया था, उसमें कहा गया था 20 हजार लोगों की भीड़ इस सत्संग में जुड़ेगी। अनुमति के लिए एसडीएम के यहां आवेदन किया गया।

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
एसडीएम ने परीक्षण के बाद अनुमति तो जारी कर दी लेकिन वहां व्यवस्थाओं को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया गया। जबकि स्थिति यह थी कि हाईवे किनारे वाहनों की भीड़ से ट्रैफिक तक प्रभावित हो रहा था। वहां ट्रैफिक का भी कोई सिपाही तैनात नहीं किया गया था। जबकि कई प्वाइंट पर जाम की स्थिति थी।

 

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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
भोले बाबा को करीब से जानने वाले लोगों का कहना है कि वह कमांडो के पहरे में रहते हैं। मंगलवार को भी वह जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो उनके साथ 16 निजी कमांडो थे। यह सभी काले कपड़ों में थे। इनका पहरा इतना सख्त होता है कि कोई बाबा के करीब तक पहुंच भी नहीं पाता है। अगर कोई बाबा तक पहुंचने की कोशिश भी करता है तो यह लोग उसे रोक देते हैं।

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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
एक हजार से अधिक वाहनों से पहुंचे थे लोग, पंद्रह दिन से चल रही थीं तैयारियांमानव मंगल मिलन सद्भावना समागम के नाम पर भीड़ जुटाई गई थी। इस आयोजन की तैयारियां पिछले कई दिनों से चल रही थीं। कुछ लोग तो दो दिन पहले ही यहां पहुंचकर डेरा जमा चुके थे।

 

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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए लोग वाहनों से पहुंचे थे। छोटे बड़े मिलाकर 1000 वाहनों की भीड़ थी। हालात यह थे कि सड़क किनारे करीब 8 किलोमीटर तक वाहनों की भीड़ नजर आ रही थी।

 
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Hathras Tragedy - फोटो : अमर उजाला
साड़ी के पल्लू से सोखकर निकाला था मैदान से पानी
चार साल पहले कोठी मीना बाजार मैदान में जब उनके सत्संग वाले दिन बारिश हो गई तो सुबह से ही उनकी अनुयायी महिलाओं ने अपनी साड़ी के पल्लू और चुनरी से कोठी मीना बाजार मैदान में भरे पानी को सोखकर निकाला था। कोठी मीना बाजार मैदान में 20 हजार से ज्यादा महिलाएं तब इस काम में लगी हुई थी, जिन्होंने दो घंटे में ही मैदान को सुखा दिया और रेत बिछाकर इसे लोगों के चलने लायक कर दिया था।
 
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