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Hathras Case: भक्तों के लिए भोले बाबा ही हैं साकार ईश्वर... बंद घर के आगे दिन भर माथा टेकने आते हैं श्रद्धालु

Sun, 07 Jul 2024 02:29 PM IST
शाहरुख खान ममता त्रिपाठी, अमर उजाला, आगरा
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
प्रेमदेवी लंबे समय से बीमार थीं, साकार हरि के शरण में आईं तो उनकी शारीरिक पीड़ा मिट गई। इसी तरह अजय के घर धीरे-धीरे स्थितियां सुधरती गईं। आज अजय के घर में किसी चीज की कमी नहीं है। प्रेमदेवी और अजय ये दो तो बानगी हैं, ऐसे कई लोग हैं जो कहते हैं कि साकार विश्व हरि (भोले बाबा) के अंदर ईश्वरीय शक्ति है, तभी तो उनकी शरण में आए व्यक्ति की पीड़ा समाप्त हो जाती है। 
 
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
यही वजह है कि हाथरस हादसे में 121 लोगों की मौत के बाद भी भोले बाबा के केदार नगर शाहगंज में बंद पड़े मकान पर पूरे दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी है।
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
वहीं मंडलीय मनौवैज्ञानिक मानते हैं कि पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा जब कम होती है या दूर हो जाती है तो उसे ऐसा करने वाले बाबाओं के चमत्कार पर विश्वास हो जाता है, उनका यह विश्वास आस्था में बदलते ही ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है।

 

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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
भोले बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा के पास चमत्कारी शक्तियां हैं जो लोगों को उनकी पीड़ा, परेशानी, दुख और समस्याओं से मुक्ति दिलाती हैं। शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे भी साकार विश्व हरि के आवास पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी थी।
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
जिस वक्त यह संवाददाता उनके आवास पर पहुंची, करीब 24-25 साल का एक युवक भोले बाबा के मकान की सीढि़यों पर सिर झुकाए बैठा था। करीब दो मिनट तक आंख बंद करके वो कुछ बुदबुदाता रहा और फिर गेट पर माथा लगाकर वापस जाने लगा।
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
युवक का नाम अजय था और वह पास की ही कॉलोनी का निवासी था। उसने बताया कि 2008 में जब घर की आर्थिक हालात बिगड़े तो रोटी तक के लाले पड़ गए। ऐसे में मम्मी को किसी ने बाबा के विषय में बताया तो मम्मी यहां आने लगीं।
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साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
बाबा के आशीर्वाद से पापा का काम चल निकला। मेरा जूते का कारखाना है और भाई की पुलिस में नौकरी लग चुकी है। सब साकार विश्व हरि की कृपा है। इसी प्रकार बाबा के दर्शन के लिए आईं 70 वर्षीय प्रेमदेवी ने बताया कि सालों से अपने स्वास्थ्य से परेशान थीं। सब जगह इलाज कराने के बाद बाबा की शरण में आईं तब से शारीरिक समस्या नहीं है।

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आश्रम में बना है साकार विश्व हरि का आलीशान महल - फोटो : पीटीआई
प्रेमदेवी के साथ आईं एक अन्य महिला भक्त ने बात करने से इन्कार कर दिया। वो सिर्फ इतना बोलीं की हम तो यहां आते रहते हैं, सत्संग में हाथरस भी गए थे और बाबा की कृपा से बिल्कुल ठीक सामने खड़े हैं।

 

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आश्रम में बना है साकार विश्व हरि का आलीशान महल - फोटो : पीटीआई
केदार नगर स्थित बाबा की कॉलोनी निवासी 37 वर्षीय बॉबी दिवाकर ने बताया कि जब वो स्कूल में पढ़ते थे तो बाबा यहीं इसी घर में रहते थे। उनके घर में उनकी पत्नी और एक भतीजी भी साथ रहती थी जो तुलसी देवी इंटर कॉलेज की छात्रा थी। 

 

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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
बाबा सुबह शाम अपने बजाज स्कूटर से ड्यूटी करने जाते थे और उनकी दिनचर्या सामान्य इंसानों जैसी ही थी। बॉबी के साथ ही स्थानीय लोग बताते हैं कि मंगलवार को भक्तों की ज्यादा भीड़ जुटती है। हर रोज शाम 4 बजे भी कुछ भक्त नियमित दर्शन के लिए आते हैं। 

 

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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
तर्क से कोई संबंध नहीं
मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. साहब सिंह कहते हैं कि इस आस्था और धर्म का तर्क से कोई संबंध नहीं होता। किसी भी बाबा को मानने वालों के चेतन और अवचेतन मन में यह बात बैठ चुकी होती है कि बाबा ही सारे दुखों का अंत कर सकते हैं। 
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
उनके चमत्कारों पर विश्वास हो जाता है। जो बच्चे बचपन से घर में बाबाओं आदि के प्रति आस्था देखते हैं वो स्वत: ही इनके अनुयायी बन जाते हैं। परिस्थितिवश अगर किसी समस्या का समाधान हो जाए तो फिर ये अनुयायी अंधभक्त में तब्दील हो जाते हैं। इस स्थिति में इनकी आस्था और विश्वास को बदलना नामुमकिन सा है।
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