ताजमहल का नाम बदलकर तेजोमहालय करने के प्रस्ताव को नगर निगम सदन के अधिवेशन में एजेंडे में लाने पर हुई किरकिरी के बाद प्रदेश सरकार गंभीर हुई है। प्रदेश सरकार ने नगर निगम सदन के अधिवेशन की सीसीटीवी फुटेज मांगी है। प्रस्ताव लगाने वाले पार्षद और सदन में हंगामा, धरना देने वाले पार्षदों के बारे में गोपनीय रिपोर्ट तलब की गई है। हंगामा और धरना देने वाले पार्षदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत हैं, जिसमें उनकी सदस्यता खत्म करने और 6 साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने के कदम उठाए जा सकते हैं।
बुधवार को नगर निगम सदन का अधिवेशन पार्षदों के जोरदार हंगामे के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। ताजमहल का नाम बदलकर तेजोमहालय करने के प्रस्ताव के कारण इस सदन पर न केवल लखनऊ, बल्कि देशभर की निगाहें लगी हुई थीं। अब शासन ने स्थानीय अधिकारियों से सदन के अधिवेशन की सीसीटीवी फुटेज मांगी है। अधिकारियों से गोपनीय रिपोर्ट भी तलब की गई है।
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मेयर नवीन जैन
- फोटो : अमर उजाला
जिन पार्षदों ने सदन के अधिवेशन में हंगामा किया और मेयर के डायस के सामने धरने पर बैठे, उनकी सदस्यता भी खत्म की जा सकती है। नियम के तहत 6 साल के लिए चुनाव लड़ने को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
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आगरा नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
इनमें चार पार्षद प्रमुख हैं जो सीसीटीवी और टीवी चैनलों के वीडियो फुटेज में नजर आ रहे हैं। इन चारों पार्षदों की गोपनीय रिपोर्ट शासन को बृहस्पतिवार शाम को भेज दी गई।
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आगरा: नगर निगम के सदन में बोलते मेयर नवीन जैन
- फोटो : अमर उजाला
वहीं इस मामले को लेकर मेयर नवीन जैन ने कहा कि डायस के सामने धरना देना गलत है। पार्षदों को अपना विरोध शब्दों से व्यक्त करना चाहिए था, लेकिन पार्षद धरने पर बैठे।