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गिरिराज पर्वत की तलहटी में आज भी हैं श्रीकृष्ण की लीलाओं के निशान, हर शिला है साक्षी

Sat, 24 Aug 2019 09:11 PM IST
मुकेश कुमार कृष्णा दुबे, अमर उजाला, गोवर्धन (मथुरा)
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गिरिराज पर्वत की शिलाओं पर निशान - फोटो : अमर उजाला
मथुरा में सात कोस में फैले गिरिराज महाराज साक्षात ईश्वर के अवतार हैं। 21 किलोमीटर की परिक्रमा में दो राज्यों (उत्तर प्रदेश और राजस्थान) की सीमा शामिल है। गोवर्धन की तलहटी में श्रीकृष्ण की लीलाओं के साक्षी दर्शनीय स्थल भी हैं, जहां श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। पर्वत पर आज भी श्रीकृष्ण की लीलाओं के चिन्ह हैं। 
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गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन के दानघाटी मंदिर का धार्मिक उल्लेख है यहां भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में बरसाना से माखन मिश्री लेकर जा रही गोपियों से दान मांगा था। आज यहां गिरिराज जी की शिला पर दूध-भोग, छप्पन भोग, फूल बंगला जैसे मनोरथ कर भक्त मनोकामना मांगते हैं। 
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गोवर्धन पर्वत
आन्यौर में संकर्षण कुंड, महाप्रभु जी की बैठक, लुक लुक दाऊजी विराजमान हैं। लुक लुक दाऊजी का धार्मिक उल्लेख है कि भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई दाऊजी ने छिपकर भगवान श्रीकृष्ण-राधा व गोपियों के रास के दर्शन किए थे। पूंछरी में पूंछरी के लौठा विराजमान हैं। यह परिक्रमा का अंतिम छोर है। इसके बाद गिरिराज तलहटी में इंद्र पूजा स्थल, सुरभि कुंड के साथ-साथ गिरिराज जी की शिलाओं पर ऐरावत हाथी, भगवान श्रीकृष्ण के चरण चिन्ह बने हुए हैं। 

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सिंदूरी शिला - फोटो : अमर उजाला
गिरिराज जी की शिलाएं भी अपने आप में अनूठी हैं। इन शिलाओं पर वजनी शिला, सिंदूरी शिलाओं के दर्शन होते हैं। आगे चलकर जतीपुरा में गिरिराज जी के मुखारविंद के दर्शन मिलते हैं। जतीपुरा के पड़ाव को पार करते हुए राधाकुंड पहुंचते हैं लेकिन राधाकुंड से पहले बैठका पर श्रद्धालुओं को बैठने पर पुण्य मिलता है। 
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राधाकुंड - फोटो : अमर उजाला
राधाकुंड में राधाकृष्ण के अटूट प्रेम की झलकी राधाकुंड-श्यामकुंड के संगम के रूप में मिलती है। कुसुम सरोवर से होते हुए परिक्रमा के अंतिम पड़ाव पर भगवान श्रीकृष्ण के मन से उत्पन्न मानसी गंगा के दर्शन करते हैं। यहां गिरिराज जी में भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट दर्शन मुकुट मुखारविंद मंदिर में मिलते हैं। भक्त मानसी गंगा में आचमन करके स्नान करते हैं। यही भाव की भक्ति श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है।
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