आगरा के फतेहपुरसीकरी के चार लोगों की मिट्टी की ढाय में दबने से माैत हो गई। चारों की लाशें गांव पहुंची तो कोहराम मच गया। शवों को देख महिलाएं बेसुध हो गईं।
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घटना से परिजनों में कोहराम मच गया।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा के फतेहपुरसीकरी के गांव उत्तू में एक साथ चार शव पहुंचने से चीत्कार मच गई। महिलाएं बेहोश होकर गिर पड़ीं। गांव में मातम पसर गया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि भी गांव में पहुंच गए। लोगों को ढांढस बंधाया। चार चिताएं एक साथ जलते देख लोगों का कलेजा कांप गया।
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गांव में जुटी भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुरसीकरी से सटा गांव दौलतगढ़ राजस्थान सीमा में आता है। यहां चंबल परियोजना के तहत कंपनी द्वारा करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। बारिश के चलते काम कुछ समय से रुका हुआ था, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। रविवार को गांव उत्तू से करीब एक दर्जन ग्रामीण मिट्टी लेने के लिए यहां गए थे। गड्ढे में उतरे, तभी अचानक ऊपर से ढाय गिर गई। इसमें करीब 10 लोग मलबे में दब गए।
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अधिकारी भी गांव में पहुंच गए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घटना की सूचना मिलते ही गहनोली मोड़ पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे में दबे सभी लोगों को बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए भरतपुर के आरबीएम अस्पताल सहित अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घटना में तीन महिला समेत चार की माैत हो गई। मृतकों की पहचान विमला (45) पत्नी श्रीपति, अनुकूल (24) पुत्र विजेंद्र सिंह, विनोद (55) पत्नी मुंशी और योगेश (25) पत्नी अमित के रूप में हुई है।
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पुलिस अधिकारियों ने दिया कंधा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी ने गड्ढा खोदने के बाद काम अधूरा छोड़ दिया था। कई बार मिट्टी लेने वालों को रोका गया, लेकिन कंपनी और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों ने पहले ही पुलिस को खतरे की आशंका जताई थी, बावजूद इसके गड्ढे की घेराबंदी या चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए। अगर इन गड्ढों को बंद कर दिया जाता तो हादसा नहीं होता।
शव पहुंचते ही गांवों में कोहराम मच गया।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मृतकों के शव गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया। लाशों को देख महिलाएं होश खो बैठीं। बेसुध हो गईं। वहीं घटना की जानकारी होने पर उप जिलाधिकारी नीलम तिवारी, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि गुड्डू चाहर गांव पहुंच गए।