आगरा में फिल्म शोले में जैसी दोस्ती जय-वीरू की नजर आई, ठीक वैसी ही दोस्ती कीठम के सूर सरोवर पक्षी विहार में विदेशी पेलिकन और देसी कारमोरेंट पक्षी के बीच नजर आ रही है। जय-वीरू की तरह शिकार के लिए दोनों ही प्रजातियों के पक्षी एक- दूसरे की मदद करते नजर आ रहे हैं।
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शानदार नजारा
- फोटो : अमर उजाला
पक्षी विशेषज्ञों के साथ बर्ड वॉचर को उनके बीच की ये केमिस्ट्री लुभा रही है। पेलिकन, कारमोरेंट, स्पॉट बिल डक, फ्लेमिंगों जैसे पक्षियों के कलरव से कीठम झील गुलजार है, लेकिन यहां देशभर के पक्षी विशेषज्ञ इन पक्षियों के प्रकृति में बदलाव का अध्ययन करने आ रहे हैं।
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विदेशी और देसी पक्षियों की जुगलबंदी
- फोटो : अमर उजाला
हर सप्ताह दो से तीन वैज्ञानिक और विशेषज्ञ कीठम पहुंच रहे हैं, इन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही है कारमोरेंट और पेलिकन की दोस्ती। झील में सुबह शिकार के समय काले रंग के देसी कारमोरेंट और सफेद रंग के विदेशी पेलिकन एक साथ नजर आते हैं।
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कीठम झील
- फोटो : अमर उजाला
इंडियन कारमोरेंट 63 सेमी लंबाई तक और ग्रेट कारमोरेंट की लंबाई 81 से 100 सेमी तक है। वन्य जीव विभाग के रेंजर अवध बिहारी के मुताबिक इन दोनों को मिलकर शिकार करते देखना रोमांचकारी है। कीठम में पक्षियों के व्यवहार, प्रकृति में बदलाव भी नजर आता है।
आगरा से लगभग 25 किमी दूर कीठम झील का दिलकश नजारा एक ही नजर में दीवाना बना देता है। बड़ी झील में मछलियों की संख्या ज्यादा होने के कारण प्रवासी पक्षियों की साल दर साल संख्या बढ़ रही है। यहां आसानी से भोजन उपलब्ध होने और सुरक्षित होने के कारण प्रवासी पक्षी हजारों किमी दूर कीठम में छह महीने तक प्रवास करते हैं।