आगरा के बाह और पिनाहट क्षेत्र में बाढ़ से हालात बेहद खतरनाक हो गए हैं। राजस्थान के कोटा बैराज से छोडे़ गए 6.94 लाख क्यूसेक पानी से चंबल नदी मंगलवार सुबह को नदी खतरे के निशान 132 मीटर को पार कर 135.30 पर पहुंच गई। 14 गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। लोगों ने बीहड़ के टीलों को अपना ठिकाना बनाया है। हालांकि प्रशासन ने अभी इस आपदा को बाढ़ घोषित नहीं किया है।
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बाढ़ से मकान डूबे
- फोटो : अमर उजाला
चंबल की बाढ़ से नदी किनारे के ग्रामीणों की जान सांसत में है। जिनके घर डूब गए। उनकी रातें बीहड़ के टीलों पर कट रही हैं। जिनके घर अभी बचे हैं,। उन्होंने सामान समेत छत पर अपना ठिकाना बनाया है। नदी के जलस्तर के साथ ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ रही हैं। बत्ती गुल होने से रात के अंधेरे में मगरमच्छ और अन्य जीवों के हमले का डर बना हुआ है।
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टीले पर रखा एक परिवार का सामान
- फोटो : अमर उजाला
पिनाहट में चंबल घाट पर बने पंप हाउस के पुल के ऊपर से पानी बहने लगा है। इससे 35 गांव जलमग्न हो गए है। वहीं मऊ की मढै़या, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, झरनापुरा, पुरा शिवलाल, पुरा डाल, उमरैठापुरा, क्योरीपुरा, डगोरा, रेहा आदि गांवों के लोगों ने अपने सामान समेट कर चंबल के टीले पर पनाह ली है।
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गांवों में स्टीमर सेवा शुरू
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प्रशासन ने झरनापुरा, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, भगवानपुरा के लिए स्टीमर सेवा शुरू करा दी है। सोमवार को डीएम एनजी रवि कुमार, एसएसपी बबलू कुमार, विधायक जितेंद्र वर्मा पिनाहट, उमरैठापुरा, गोहरा पहुंचे और बाढ़ से प्रभावित लोगों का हाल जाना।
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ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर ले जाता बचाव दल
- फोटो : अमर उजाला
आपात स्थिति में बचाव और राहत के लिए लखनऊ से एसडीआरएफ की टीम बुलाई गई हैं। तहसीलदार हेमचंद्र शर्मा ने बताया कि थाना मंसुखपुरा, बासौनी, पिनाहट, खेड़ा राठौर और जैतपुर में टीमों को रखा गया है।
प्रशासन ने चंबल नदी के किनारे के गांवों को खाली कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार चंबल नदी 1996 के स्तर 138 मीटर के रिकार्ड को तोड़ सकती है।