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ताजनगरी पर बाढ़ का खतरा, यमुना में छोड़ा गया 21 लाख क्यूसेक पानी, बीहड़ में चंबल ने मचाई तबाही

Mon, 19 Aug 2019 12:09 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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उफान पर बह रही यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
भारी बारिश और हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने से यमुना नदी में उफान आ गया है। इससे आगरा पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। रविवार को यूपी-हरियाणा सीमा पर स्थित हथिनीकुंड बैराज से 21 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह बुधवार तक आगरा पहुंच जाएगा। इसके मद्देनजर सदर तहसील क्षेत्र में यमुना किनारे के गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया। उधर, आगरा के बाह क्षेत्र में चंबल नदी भी तबाही मचा रही है। 
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बटेश्वर में उफान पर बह रही यमुना - फोटो : अमर उजाला
सदर तहसील के चार गांव लो फ्लड, सात गांव मीडियम फ्लड और 27 गांव हाई फ्लड दायरे में हैं। यमुना नदी किरावली, सदर, फतेहाबाद, फतेहाबाद, बाह और एत्मादपुर तहसील क्षेत्र से गुजरती है। कैलाश मंदिर, अमर विहार पुलिस चौकी, पोइया घाट, बल्केश्वर घाट, आगरा फोर्ट, करमना, तनौरानूरपुर, समौगर में बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। प्रत्येक चौकी पर 13 कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार नजर रखे हुए हैं।
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हथिनी कुंड बैराज से छोड़ा गया पानी - फोटो : अमर उजाला
आगरा सदर के उपजिलाधिकारी अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि यमुना में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए यमुना किनारे अलर्ट कर दिया गया है। आठ चौकियां भी स्थापित कर यहां ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत मदद उपलब्ध कराई जा सके। बाढ़ चौकियों पर लेखपाल, सहायक विकास अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी/ग्राम पंचायत अधिकारी, आंगनबाड़ी, सीडीपीओ, क्षेत्रीय उप निरीक्षक, खंड शिक्षा अधिकारी, एनपीआरसी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, एएनएम की ड्यूटी लगाई गई है। 

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हथिनी कुंड बैराज से छोड़ा गया पानी - फोटो : अमर उजाला
हथिनी कुंड बैराज से रविवार को दिनभर में छोड़े गए करीब 21 लाख क्यूसेक पानी का असर अगले दो दिन में दिल्ली में दिखेगा। यमुना सोमवार को खतरे के निशान को पार कर गई है। केंद्रीय जल आयोग से दिल्ली सरकार को मिले अलर्ट के मुताबिक, सोमवार देर शाम से इसका असर दिल्ली में दिखने लगेगा।
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बाढ़ के पानी में डूबा सूचना बोर्ड - फोटो : अमर उजाला
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार यमुनी नदी में खतरे के निशान
495 फुट पर:  खतरे का निशान है यमुना नदी का शहर में।
499 फुट पर :  डूब क्षेत्र में पहुंचने लगता है यमुना का पानी।
508  फुट पर :  बेलनगंज में पहुंच गया था पानी 1978 की बाढ़ में।
520 फुट पर :  पूरा शहर आ सकता है बाढ़ की चपेट में।
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बाह में बाढ़ के पानी में डूबी झोपड़ी - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान के कोटा बैराज से छोड़े गए 1.62 लाख क्यूसेक पानी से चंबल नदी ने बाह के गांवों में भारी तबाही मचाई है। नदी किनारे के 34 गांवों के हजारों बीघा खेतों में खड़ी बाजरा, तिल की फसलें डूब गई हैं। पानी से घिरे गांव टापू बन गए हैं। हालांकि रविवार को खतरे के निशान के करीब पहुंच कर चंबल नदी दिनभर स्थिर रही पर तराई के गांवों में बाढ़ का खतरा टला नहीं है।
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बाढ़ के पानी में डूबी झोपड़ियां - फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी दो दिन में 15 मीटर चढ़कर 131 मीटर के स्तर पहुंच गई थी। खतरे के निशान 132 मीटर के करीब पहुंचकर थमी चंबल का जलस्तर रविवार को 130 मीटर के आसपास बना रहा। बाह के गांव भगवानपुरा, हथकांत, नंदगवां, महुआशाला, खेड़ा राठौर, सिमराई, धांधूपुरा, झरनापुरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल, उमरैठापुरा, क्यौरीपुरा, रेहा, बरैंडा आदि गांवों तक पानी पहुंच गया है। 6 गांव गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, मऊ की मढै़या, डगोरा का तहसील मुख्यालय से रविवार को भी संपर्क टूटा रहा।
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स्टीमर में सवार ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
प्रशासनिक स्तर से राहत के नाम पर रानीपुरा, गोहरा, भटपुरा के लिए ही स्टीमर सेवा शुरू की गई है। आठ बाढ़ चौकियों मंसुखपुरा, पिनाहट, उमरैठा, बासौनी, सिरामई, पुरा भगवान, खेड़ा राठौर, नंदगवां में संसाधन जुटाने में एसडीएम महेश प्रकाश गुप्ता, तहसीलदार हेमचंद्र शर्मा कर्मचारियों के साथ जुटे रहे। लेखपालों को गांव में रुकने की हिदायत दी गई है। 
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