अंजलि की मौत मामले में पति ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि पहले गर्भवती पत्नी को धक्का दिया इसके बाद लात मारी। दोषी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी करने की मांग की। शिकोहाबाद के लभौआ गांव में चोरी के शक में पुलिस द्वारा रविवार रात पति गौरव को हिरासत में लिए जाने के सदमे से उसकी गर्भवती पत्नी अंजली (28) की तबीयत बिगड़ गई। सोमवार सुबह प्रसव के बाद निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद के गांव मोहम्मदपुर लभौआ में रविवार आधी रात पति गौरव कुमार को उठाने और सोमवार सुबह प्रसव के बाद पत्नी अंजलि की मौत के मामले में मंगलवार को भी शिकोहाबाद थाने में तीन घंटे तक हंगामा हुआ।
आरोप है कि अनुसूचित जाति की अंजलि की मौत पुलिसकर्मियों की ओर से धक्का देने, लात मारने और अभद्रता करने से हुई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि 6 पुलिसकर्मियों का निलंबन काफी नहीं है। मौत के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर हत्या की प्राथमिकी क्यों न दर्ज की जाए?
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पीड़ित पति गौरव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मृतका अंजलि के पति गौरव कुमार की ओर से दी गई तहरीर मंगलवार को सामने आई। तहरीर में गौरव ने आरोप लगाया है कि उसके घर पर रात लगभग 11:30 बजे एसआई धर्मपाल 10-12 पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे। कुछ सिपाही सादी वर्दी में भी थे। उनके पास न तो सर्च वारंट था और न ही वह किसी प्राथमिकी में नामजद थे।
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अंजलि की मौत के बाद गमगीन परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिसकर्मी घर में घुस आए और महिलाओं से गाली-गलौज व धक्का-मुक्की करने लगे। दरोगा धर्मपाल ने आपा खोते हुए गर्भवती पत्नी अंजलि से धक्का मुक्की की और उसके पेट में लात मार दी, जिससे वह जमीन पर गिर गई। पेट में तेज दर्द होने के साथ ब्लीडिंग होने लगी।
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अंजलि की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजन अंजलि को तत्काल शिकोहाबाद संयुक्त चिकित्सालय ले गए, जहां सोमवार सुबह उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई और उनका नवजात बच्चा जिंदगी की जंग लड़ रहा है। वह आगरा के एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर है।
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Anjali Death case
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
यह आरोप भी है कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने लापरवाही करते हुए उनकी मृतक पत्नी को जानबूझकर रेफर कर दिया। उधर, पुलिस गौरव कुमार और गांव के ही अजेंद्र सागर को जबरन थाने ले गई।
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अंजलि की मौत के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने पुलिस से कई बार कहा कि पेट में लात लगने से उनकी पत्नी की हालत गंभीर है। उन्हें उसे दिखाना है, इसलिए जाने दिया जाए, लेकिन पुलिसकर्मियों ने एक न सुनी। पत्नी की मृत्यु की सूचना मिलते ही दरोगा ने अपना अपराध छिपाते हुए सोमवार सुबह उन्हें और अजेंद्र को छोड़ दिया।
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अंजली और विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
चोरी की झूठी सूचना पर खाकी की गुंडागर्दी
पीड़ित परिवार का दावा है कि गांव के ही जहेश की परचून की दुकान में शुक्रवार रात चोरी हुई। रंजिश में उसने गौरव और अजेंद्र का नाम ले लिया। जहेश के कहने पर ही पुलिस ने रात के अंधेरे में जमकर गुंडागर्दी की। पीड़ित परिवार ने इंसाफ न मिलने पर उग्र आंदोलन और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
अंजलि के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया। वीडियोग्राफी भी कराई गई। डॉ. राहुल जैन की अध्यक्षता वाले पैनल ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर अपनी रिपोर्ट को बंद लिफाफे में पुलिस को सौंप दिया।
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अनुज चौधरी
- फोटो : संवाद।
हमने तीन दिन में जांच पूरी करने का समय मांगा है। निर्धारित समय सीमा में सभी बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट आलाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। जांच रिपोर्ट में गुणदोष के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - अनुज चौधरी, एसपी देहात
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस से जनता के पांच सवालों के जवाब चाहिए
अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद रात में ही क्यों गौरव को हिरासत में लिया गया?
गौरव के खिलाफ क्या सबूत थे, जो पुलिस ने देर रात घर पर दबिश देकर कार्रवाई की?
गर्भवती महिला के मिन्नतें करने के बाद भी पुलिस ने उसकी बात उसके पति से क्यों नहीं कराई?
रात को जब पूछताछ के लिए गौरव को हिरासत में लिया, तो पत्नी की मौत के बाद तुरंत क्यों छोड़ दिया गया?
मामले के आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई?
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पीड़ित परिवार से बात करते सपा के सांसद राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने की पूरे थाने को सस्पेंड कर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग
राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने इस घटना को लेकर पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एक षड्यंत्र के तहत दो युवकों को उठाया और जब गर्भवती पत्नी ने अपने पति को ले जाने का विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का दिया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।
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पुलिस से बात करते सपा के सांसद राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सांसद रामजीलाल सुमन ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि इस घटना में संलिप्त पूरे पुलिस थाने को तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया पूरा थाना दोषी है और महिला की जान लेने के मामले में सभी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
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पुलिस से बात करते सपा के सांसद राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह मनमाना और संदेहास्पद करार दिया है। राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि जांच अधिकारी जयबिंद कुमार गुप्ता ने तीन दिन में निष्पक्ष तौर पर जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। अगर, इस जांच में पीड़ित परिवार के साथ इंसाफ नहीं हुआ और परिवार ने असंतुष्टि जताई तो सपा परिवार पीड़ित परिवार के साथ खड़ा हुआ है। हम परिवार के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।
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पुलिस और परिजनों में हुई बहस
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा सदन में भी इस मुद्दे को उठाएंगे। धरने में सपा की ओर से जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव, विधायक सिरसागंज सर्वेश यादव, पूर्व विधायक रमेश चंचल, अजीम भाई, पूर्व जिलाध्यक्ष हरीशंकर यादव, रामसेवक यादव, श्रीनाथ और जिला प्रवक्ता नीरज यादव सहित सपा के 100 से अधिक लोग, पीड़ित परिवार के लोग और ग्रामीण मौजूद रहे। इस दौरान कई थानों का फोर्स भी शिकोहाबाद थाने पर हंगामे की दृष्टि से तैनात किया गया।
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परिजनों ने फेंकी कुर्सियां
- फोटो : अमर उजाला
इंस्पेक्टर से पूछा आपने रात में ही क्यों नहीं लिया संज्ञान
गांव लभौआ में प्रो. सुमन ने परिवार से बात करने के बाद पुलिसकर्मियों से कई सवाल किए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए इंस्पेक्टर अनुज राणा से कहा कि आपने इस मामले का देर रात ही संज्ञान क्यों नहीं लिया। क्या पूरी रात हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ते रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने एसपी देहात से भी इस बिंदु पर बातचीत कर कार्रवाई किए जाने की मांग की।
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पुलिकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने में बैठे लोग
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पुलिस ने कहा- डिलीवरी के दौरान हुई महिला की मौत, पोस्टमार्टम में नहीं मिली बाहरी चोट
लभौआ प्रकरण में मंगलवार को पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर स्पष्टीकरण जारी किया। पुलिस द्वारा जारी बयान में पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट या अभद्रता किए जाने के आरोपों का खंडन किया गया है। पुलिस के अनुसार, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 6 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की संपूर्ण जांच एएसपी शिकोहाबाद (आईपीएस) जयबिंद कुमार गुप्ता को सौंपी गई है।
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अंजली और उसके परिजन
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने दावा किया है कि 13 सितंबर की शाम को चोरी के मुकदमे के सिलसिले में संदिग्ध गौरव को थाना शिकोहाबाद पुलिस द्वारा थाने लाया गया था। पुलिस का कहना है कि घर से थाने लाते समय गौरव की पत्नी अंजलि या परिवार के अन्य सदस्यों के साथ किसी भी पुलिसकर्मी ने मारपीट नहीं की। थाने पर लाने के बाद विधिवत जीडी एंट्री की गई थी। अगले दिन 14 सितंबर की सुबह पूछताछ के बाद गौरव को उसके परिजन के सुपुर्द कर दिया गया था। इसी दौरान गौरव की गर्भवती पत्नी अंजलि को उसके परिजन द्वारा प्रसव (डिलीवरी) के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां बच्चे को जन्म देने के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर कोई बाहरी चोट (एक्सटर्नल इंजरी) नहीं पाई गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि पुलिस द्वारा कोई मारपीट नहीं की गई थी। हमने तीन दिन में जांच पूरी करने का समय मांगा है। निर्धारित समय सीमा में सभी बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट आलाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। जांच रिपोर्ट में गुणदोष के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।