दिल्ली में रविवार सुबह अनाज मंडी इलाके में लगी भीषण आग में 45 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जानमाल के बड़े नुकसान का कारण बताया गया आबादी के बीच कारखानों का चलना। यह वजह बड़ी चिंता पैदा करने वाली है क्योंकि ताजनगरी में भी तंग गलियों में 16 हजार कारखाने चल रहे हैं। इनमें जूते के कारखाने हैं और चांदी के गहने बनाने के भी। दोनों में ज्वलनशील रसायन का इस्तेमाल होता है। घरों में चल रहे गत्ते के गोदाम, डिब्बे बनाने के कारखाने, कबाड़ की दुकानों में भी आग का खतरा कम नहीं है। अमर उजाला टीम ने ऐसे इलाकों का जायजा लिया जिनमें कारखाने चल रहे हैं। स्थिति यह है कि आग लग जाए तो दमकल का पहुंचना मुश्किल है। गाड़ी तो पहुंचती ही नहीं, पाइप से पानी पहुंचाने में आधा घंटा तक लग जाता है...
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आग का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
24 मई 2002 की सुबह लगभग सवा दस बजे जीवनी मंडी स्थित जूता कंपनी श्रीजी इंटरनेशनल में लगी आग में 44 लोगों की मौत हो गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मौके पर आए थे। शासन -प्रशासन के अफसरों ने कहा कि यह घटना बड़ा सबक है। अब ऐसे इंतजाम किए जाएंगे जिनसे भविष्य में ऐसा कोई हादसा न हो। कमेटी का गठन कर कारखानों के लिए निर्देश तो जारी कर दिए गए लेकिन 17 साल में भी इन पर अमल नहीं हो पाया।
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आग का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
श्रीजी इंटरनेशनल में आग मुख्य दरवाजे के रास्ते पर लगी थी। वहां रसायनों के ड्रम रखे थे। आग लग जाने से अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए। यही मौत का कारण बना। आग बुझने से पहले ही 44 की जान चली गई। फैक्टरी के अंदर 250 लोग थे। उस समय प्रशासन के अफसरों ने कहा था कि हर फैक्टरी का मुआयना कराया जाएगा। आग से बचाव के लिए उपाय कराए जाएंगे। लेकिन थोड़े दिन बाद किसी ने ध्यान ही नहीं दिया।
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tajmahal
सेवला में जिंदा जल गए थे दस लोग: भीषण अग्निकांड में सदर के सेवला में दो भाइयों के परिवारों के दस सदस्यों का जिंदा जल जाना भी शामिल है। यह अग्निकांड 12 अक्तूबर 2012 को हुआ था। घर में रखे थिनर, तारपीन और अन्य केमिकल पर जलती मोमबत्ती गिर जाने से आग लगी थी। केमिकल में आग के कारण धमाके दूर तक सुने गए थे। मृतकों में छह बच्चे शामिल थे। नौ नवंबर 2013 को हलवाई की बगीची स्थिति मेट्रो एंड मेट्रो फैक्ट्री में आग लगी थी। दम घुटने से दो लोगों की मौत हो गई थी। घटना के सदमे में फैक्टरी मालिक डीएन कल्सी की जान चली गई थी।
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आबादी के बीच कारखाने
- फोटो : अमर उजाला
सिर्फ ये तीन मामले नहीं। आग की हर चौथी घटना पर यही स्थिति सामने आ रही है। घनी आबादी के बीच तंग गली की किसी इमारत में आग लगती है। दमकल को आग बुझाने से पहले वहां पहुंचने में ही जूझना पड़ता है। काजीपाड़ा, टीला नंदराम, गालिबपुरा, मंटोला, ढोलीखार, प्रकाश नगर, प्रेम नगर, राम नगर, भोगीपुरा, जगदीशपुरा, गढ़ी भदौरिया, कैंथवाली बस्ती, लोहामंडी, चक्की पाट, धनौली, एत्माद्दौला, लाल मस्जिद, नुनिहाई, ग्वालियर रोड में आबादी के बीच कारखाने चल रहे हैं। टोरंट पॉवर के अधिकारियों ने बताया कि शहर में कुल चार लाख कनेक्शन हैं। इनमें से 25 हजार हैवी लोड के कनेक्शन हैं। ये आबादी के बीच ही दिए गए हैं। माना जाता है कि इनमें से नौ हजार बड़े शोरूम के हैं। अन्य 16 हजार घर-घर चल रहे कारखानों के हैं।
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आवासीय कॉलोनियों में खुले शोरूम
- फोटो : अमर उजाला
आवासीय कॉलोनियों में खुले शोरूम: कमला नगर, आवास विकास, शास्त्रीपुरम में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक कांप्लेक्स बन गए हैं। इनमें होटल, रेस्तरां, जिम्नेजियम, बेकरी चलाए जा रहे हैं। कमला नगर में यह स्थिति सबसे ज्यादा है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा बताते हैं कि आबादी के बीच गोदाम और कारखाने चलने की हर महीने लगभग दस शिकायतें आ रही हैं। इनको एडीए, कारखाना विभाग के पास कार्रवाई के लिए भेज दिया जाता है।
ये निर्देश दिए गए थे: एडहेसिव-केमिकल, सोल्यूशन का भंडारण कारखाने से दूर किया जाए। एक दिन के लिए प्रयोग होने लायक स्टॉक ही फैक्टरी
परिसर में लाया जाए। फैक्टरी में आपातकालीन कई गेट और खिड़कियां होनी चाहिए। इनके बारे में स्टाफ को जानकारी भी होनी चाहिए। जूता, चांदी, गत्ते आदि के कारखाने में नो स्मोकिंग जोन का सख्ती से पालन कराया जाए। फायर ब्रिगेड की एनओसी अनिवार्य रूप से ली जाए, कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिलाया जाए। अग्निशमन उपकरण कर्मचारियों की पहुंच में हो। एक्सपायरी डेट पर इन्हें बदल दिया जाए।