आगरा के सिकंदरा में दो फैक्टरियों में लगी आग को बुझाने में 2.5 लाख लीटर पानी और 500 लीटर फोम का प्रयोग हुआ। सोमवार दोपहर तीन बजे से मंगलवार सुबह पांच बजे तक 14 घंटे लगातार दमकलकर्मी फैक्टरियों में डटे रहे। सोमवार रात 12 बजे आग काबू में आ जाने के बाद दो बजे मुख्य अग्निशमन अधिकारी चले गए। उन्होंने बताया कि 60 कर्मचारियों ने 14 घंटे तक बिना रुके काम किया। फैक्टरी में केमिकल से भरे तीन टैंक थे, जिन तक आग नहीं पहुंचने दी गई। वह सुरक्षित बच गए।
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फैक्टरी में पड़ा मलबा
- फोटो : अमर उजाला
केमिकल फैक्टरी में गेट के सामने ही आग लगी थी। इससे कुछ दूरी पर ही केमिकल से भरे हुए तीन भूमिगत टैंक थे। इन टैंक में ज्वलनशील केमिकल था। जब सीएफओ को इस बारे में पता चला तो उन्होंने तीन दमकलों को फैक्टरी के दायें, बायें और पिछले हिस्से में लगाया। यहां से टैंकों की कंकरीट की दीवार पर पानी डाला गया, जिससे दीवार गर्म न हों। उसमें नमी बन रहे। इससे आग नहीं लगी।
अग्निशमन का अनापत्ति पत्र नहीं था : सीएमओ
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि दोनों फैक्टरियों की फाइलें दिखवाई गई हैं। इन्हें अग्निशमन विभाग से अनापत्ति पत्र जारी नहीं किया गया था लेकिन मालिकों ने बताया कि उनके पास विस्फोटक नियंत्रण विभाग का अनापत्ति पत्र है। ऐसे में अग्निशमन विभाग का अनापत्ति पत्र अलग से जारी नहीं होता है। इसे दिखवाया जा रहा है। विस्फोटक नियंत्रण विभाग से जानकारी मांगी गई है। अगर वहां से अनापत्ति पत्र नहीं मिलता है तो नोटिस जारी किया जाएगा।
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आग लगने के दूसरे दिन फैक्टरी का हाल
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस को चाहिए 12 सवालों के जवाब, फैक्टरी मालिक ने कहा-बाद में बताएंगे...
आगरा के सिकंदरा में एक ही परिसर में चल रहीं जूता सोल और केमिकल फैक्टरी में लगी आग के मामले में पुलिस ने 12 सवालों की सूची तैयार की है। इनके जवाब फैक्टरी मालिक भाइयों रवि मनचंदा और दीपक मनचंदा से मांगे हैं। उन्होंने फिलहाल सिर्फ इतना कहा है कि इनके बारे में बाद में बात करेंगे, अभी वे सदमे में हैं। दूसरे दिन भी आग से हुए नुकसान का आकलन नहीं हो सका।
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फैक्टरी में लगी भीषण आग का धुंआ आसमान में दिखता हुआ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
शाहगंज के चारबाग निवासी दीपक मनचंदा की आगरा केमिकल और उनके भाई रवि मनचंदा की टॉप लास्ट के नाम से जूते के सोल की फैक्टरी में सोमवार दोपहर तीन बजे आग लगी थी। यह रात 12 बजे काबू में आई, लेकिन दो बजे फिर से सुलग गई। मुख्य अग्निश्मन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि एहतियातन दमकलें वहीं रखी गईं थीं। रसायन की आग में अक्सर ऐसा होता है कि यह बुझते बुझते फिर से सुलग जाती है। मंगलवार सुबह पांच बजे यह पूरी तरह से बुझ गई।
सिकंदरा स्थित फैक्टरी में लगी भीषण आग की तस्वीरें (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के सवालों की सूची
1. दो फैक्टरी एक ही परिसर में संचालित हो रहीं थीं, इनके नाम और जीएसटी नंबर क्या हैं?
2. इन फैक्टरी के मालिक कौन-कौन और कब से हैं?
3. दोनों फैक्टरियां कब से संचालित की जा रहीं हैं?
4. फैक्टरी में आग बुझाने के क्या इंतजाम थे?
5. फैक्टरियों में कितने कर्मचारी काम करते हैं?
6. आग लगने का कारण क्या था?
7. अग्निश्मन विभाग की एनओसी ली गई थी या नहीं?
8. फैक्टरी में कौन-कौन से रसायन बनाए जाते हैं?
9. आग लगने पर इसे बुझाने के लिए क्या प्रयास किए गए?
10. फैक्टरी में आने-जाने के कितने रास्ते हैं?
11. केमिकल फैक्टरी में बिजली कनेक्शन था या नहीं?
12. फैक्टरी में कितनी मात्रा में केमिकल रखे जाने की अनुमति है।
जवाब संतोषजनक नहीं मिलते तो कार्रवाई की जाएगी
सवालों की सूची तैयार कर ली गई है। फैक्टरी मालिकों से जवाब लिए जाएंगे। यदि ये संतोषजनक नहीं मिलते हैं तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अरविंद कुमार, प्रभारी निरीक्षक थाना सिकंदरा