पति-पत्नी के झगड़े के बाद सावित्री अपने पिता के घर सराय अगहत चली गई और पारस नौकरी के सिलसिले में अपने परिवार के साथ होली से पहले ही दिल्ली जाकर रहने लगा। पत्नी के परिजनों को जानकारी मिली कि पारस मकान बेचने की फिराक में है। इसके बाद ही गुरुवार को सावित्री अपने पिता रक्षपाल के साथ यहां आकर रहने लगी। वहीं जानकारी मिलते ही बौखलाहट में पारस और उसके परिजन भी घर पहुंच गए। सावित्री और रक्षपाल को बात नहीं मानता देखकर आरोपियों ने उनकी हत्या कर दी।
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घटना के बाद मृतकों के शव ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
दोहरे हत्याकांड के बाद मौके पर पहुंचे सावित्री के भाई राहुल गुप्ता ने बताया कि पांच दिन पहले कस्बे के संभ्रांत लोगों की मौजूदगी में पंचायत बुलाई थी। पंचायत में पारस और उसके परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ। फोन पर बातचीत में उसने कह दिया वह अब वहां नहीं आएंगे। पारस द्वारा मकान बेचने की सूचना के बाद सावित्री और उसके परिजन एकराय होकर पारस के घर पर रहने पहुंच गए। इसकी जानकारी पड़ोस में रहने वाले पारस के ताऊ ने उसे दे दी। इससे बौखलाकर पारस अपनी मां मैना देवी और पिता गिरीश चंद्र के साथ अलीगंज पहुंच गया। इसके बाद देर रात जमकर झगड़ा हुआ। चीखपुकार और शोर सुनकर मोहल्ले वालों ने प्रतिदिन की बात समझकर गंभीरता से नहीं लिया। इसी दौरान पारस ने अपने परिजनों के साथ सावित्री और उसके पिता को बांधकर मार डाला।
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हत्याकांड के बाद मौके पर मौजूद भीड़
- फोटो : अमर उजाला
घटना को अंजाम देने के बाद पारस और उसकी मां मैना देवी, पिता गिरीश चंद्र, ताऊ भगवानदास भाग रहे थे। इस दौरान गांव के लोगों को शक हुआ। ग्रामीणों ने उन्हें रोकने को आवाज दी लेकिन वह नहीं रुके। इसके बाद ग्रामीण घर की ओर गए और वहां की स्थिति देख पुलिस को सूचना दी।
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हत्याकांड के बाद मौके पर मौजूद भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों ने बताया कि बाप, बेटी की हत्या करने से पहले पारस और उसके घर वाले तीन माह पहले भी सावित्री और उसके मायके वालों के साथ मारपीट कर पथराव किया था। हालांकि सावित्री की जिंदगी को देखते हुए पिता रक्षपाल समझौता कराना चाहता था। वह लोग चाहते थे बेटी का घर बसा रहे। इसके चलते उस समय पुलिस को सूचना नहीं दी थी।
दोहरे हत्याकांड के बाद जांच पड़ताल करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम हाउस पर मृतक रक्षपाल के बेटे राहुल ने बताया कि उसकी बहन को ससुरालीजन परेशान करते थे। इसकी शिकायत उसने महिला आयोग के साथ थाना अलीगंज पुलिस को दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। पुलिस का कहना है कि मृतक ने प्रार्थना पत्र देने के बाद रिपोर्ट दर्ज न करने की बात कही थी। जिसे लेकर मामले की एफआईआर दर्ज नहीं की गई।