आगरा की चौपाटी में जिप लाइन पर बिना हेलमेट और सुरक्षा इंतजामों के 16 वर्षीय कुनाल को सवार कराया गया, जिससे हादसे में उसकी मौत हो गई। जांच में सामने आया कि पुली का लॉक कमजोर था और नीचे सुरक्षा जाल या गद्दे भी नहीं लगाए गए थे।
आगरा चाैपाटी में लापरवाही ने चूड़ी व्यापारी पंकज अग्रवाल के घर के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया। जिप लाइन में मानकों की अनदेखी की वजह से हादसा हुआ। किशोर को बिना हेलमेट ही सवार कर दिया गया था। पुली का लाॅक भी मजबूत नहीं था, 10 फीट आगे चलते ही वो टूट गया। जिप लाइन के नीचे किसी तरह का जाल और गद्दा भी नहीं रखा गया था।
ताजमहल देखने आने वाले पर्यटक और स्थानीय निवासी रोजाना चाैपाटी में बड़ी संख्या में आते हैं। हादसे ने सुरक्षा मानकों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यटकों को एडवेंचर स्पोर्ट्स का अनुभव कराने के लिए आगरा विकास प्राधिकरण ने चाैपाटी में एक साल पहले जिप लाइन की शुरुआत की थी। इसका ठेका दिल्ली की फर्म ईओडी एडवेंचर पार्क (विजन एम्यूसमेंट पार्क प्राइवेट लिमिटेड) को दिया गया है।
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आगरा चौपाटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसकी टिकट भी 400 रुपये है। इसमें जिप लाइन, चिप साइकिल और बुल राइड शामिल रहते हैं। 120 फीट लंबी जिप लाइन की ऊंचाई 45 फीट है। पर्यटकों के अलावा स्थानीय और आस-पास जिलों के लोग भी यहां पहुंचते हैं। रविवार को घटना की जानकारी पर पुलिस आयुक्त दीपक कुमार भी पहुंच गए। उन्होंने माना कि जिप लाइन में मानकों की अनदेखी हो रही थी। हुक टूटने से हादसा होना बताया जा रहा है। इसकी जांच इंजीनियर से कराई जाएगी।
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जांच करते पुलिस अधिकारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जाल और गद्दे होते तो बच सकती थी जान
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि जिप लाइन में एक तरफ से दूसरी तरफ तार के सहारे पहुंचाया जाता है। जिस हुक के सहारे किसी व्यक्ति को लटकाया जाता है, वो मजबूत होना चाहिए। इसके साथ ही इसके नीचे मजबूत जाल होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति गिर जाए तो इसकी वजह से बच सकता है। इसके साथ ही जमीन पर मोटे गद्दे भी रख सकते हैं। मगर चाैपाटी में ऐसा नहीं था। नीचे फर्श थी। जाल या गद्दा भी नहीं लगाया गया था। चूड़ी व्यापारी के बेटे कुनाल को हेलमेट भी नहीं पहनाया गया था। इससे जब वह नीचे गिरा तो उसका सिर भी टकरा गया। उसकी जान नहीं बच सकी।
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जांच करते पुलिस अधिकारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नहीं होती कोई जांच
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गर्मी के माैसम में चाैपाटी आने वाले पर्यटकों की संख्या शाम के समय अधिक रहती है। एक के बाद एक लोगों को जिप लाइन पर एडवेंचर का अनुभव कराया जाता है। हादसे ने सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी। अगर पहले से जांच की जाती तो यह हादसा नहीं होता। मानकों की तरफ संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी ध्यान नहीं दिया।
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आगरा चौपाटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
क्या है जिप लाइन
जिप लाइन झूला एक एडवेंचर स्पोर्ट्स और मनोरंजन का साधन है, जिसमें एक मजबूत स्टील के तार (केबल) के सहारे ऊंचे स्थान से नीचे की ओर सरकते हुए सफर किया जाता है। इसमें व्यक्ति को एक सुरक्षा हार्नेस पहनाकर पुली के जरिये तार से लटका दिया जाता है। गुरुत्वाकर्षण से व्यक्ति बहुत तेजी से ऊंचाई से ढलान की ओर सरकता है। टूरिस्ट प्लेस पर जिप लाइन की डिमांड अधिक है। इसे हमेशा प्रमाणित एडवेंचर ऑपरेटरों की देखरेख में ही करना चाहिए। राइड शुरू करने से पहले सुरक्षा बेल्ट, कैराबिनर (लॉकिंग क्लिप) और हेलमेट की जांच अच्छी तरह कर लेनी चाहिए। वजन और उम्र की सीमाओं का पालन करना जरूरी है।
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आगरा चौपाटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाटी में मनोरंजन के नाम पर मौत का खेल
वाटर पार्क में आठ साल के मासूम की डूबकर मौत होने के एक हफ्ते में ही रविवार को चौपाटी में जिप लाइन झूले से गिरकर किशोर उम्र के कुनाल की जान चली गई। लोगों का आरोप है कि चौपाटी में मनोरंजन के नाम पर मौत का खेल हो रहा है। सुरक्षा मानकों और फिटनेस का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इस हृदय विदारक घटना ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) और झूला संचालित करने वाली कंपनी के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। चंद रुपयों के मुनाफे के लिए सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया गया, जिसका खामियाजा एक परिवार को अपना चिराग खोकर चुकाना पड़ा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस मासूम की मौत का जिम्मेदार कौन है। ठेकेदार की अनदेखी या एडीए की लापरवाही।
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पुलिस
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जिम्मेदारों पर उठते गंभीर सवाल सुरक्षा उपकरण कहां थे :
जिप लाइनिंग जैसे जोखिम भरे झूले पर सुरक्षा हार्नेस, लॉक और नेट जैसे बुनियादी मानकों का सख्ती से पालन क्यों नहीं किया गया?
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पुलिस
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एडीए की मॉनिटरिंग फेल :
आगरा विकास प्राधिकरण जो इस पूरे प्रोजेक्ट का प्रबंधन करता है, क्या उसकी जिम्मेदारी केवल 30 से अधिक फूड स्टॉल्स की नीलामी और पंजीकरण कर किराया वसूलने तक ही सीमित है?
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विलाप करते परिजन
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झूलों का फिटनेस सर्टिफिकेट :
क्या झूला संचालित करने वाली कंपनी के पास पुख्ता सुरक्षा प्रमाणपत्र था और क्या समय-समय पर इसकी तकनीकी जांच की जाती थी?
सुविधाओं का जाल मगर सुरक्षा सिफर
जोनल पार्क (आगरा चौपाटी) को एक बड़े टूरिस्ट हब के रूप में विकसित किया गया है। यहां हर उम्र के लोगों के लिए गतिविधियां हैं। भव्य व्यवस्था और करोड़ों के इस प्रोजेक्ट की मूल संचालन संस्था आगरा विकास प्राधिकरण है। लोगों का आरोप है कि सुविधाओं का इतना बड़ा जाल बिछाया गया है लेकिन जब बात बच्चों की जान की सुरक्षा की आती है, तो पूरी व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आती है। पुलिस की जांच अब इस बात पर टिकी है कि जिप लाइन के संचालन में तकनीकी खराबी थी या यह पूरी तरह से ठेकेदार की लापरवाही का नतीजा है। जो भी हो, इस हादसे ने आगरा चौपाटी की चकाचौंध के पीछे छिपी बदइंतजामी की खौफनाक तस्वीर पेश कर दी है, जिसका जवाब अब जिम्मेदारों को देना ही होगा।