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कोरोना का असर: 'अपनों' के अस्थि कलशों को लेने नहीं आ रहे लोग, विद्युत शवदाह गृह जाने से बच रहे परिजन

Fri, 28 May 2021 02:58 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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अस्थि कलश - फोटो : अमर उजाला
मोक्षस्थली पर अस्थि रूपी फूल मोक्ष के लिए इंतजार कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण या अन्य वजह से काल के गाल में समा गए लोगों की अस्थियां अभी गंगा में प्रवाहित होने का इंतजार कर रही हैं। अप्रैल से लेकर 15 मई तक शवों का अंतिम संस्कार करने के बाद कुछ परिवार अस्थियां लेने नहीं पहुंचे हैं। कई परिजनों ने विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी को कोरोना लहर थमने के बाद अस्थियां ले जाने के लिए कहा है। ऐसे कई परिवार हैं जिनमें सभी लोग क्वारंटीन हुए थे। इस कारण भी अस्थियां लेने नहीं पहुंचे हैं। कुछ लोग लॉकडाउन के खुलने का इंतजार कर रहे है। ट्रांसयमुना निवासी व्यक्ति की मां का पांच मई को देहांत हो गया था। उनका कहना है कि हमने इस काल को जिस तरह से सहा है, वह काफी पीड़ादायक है। अभी मैं मां की अस्थियां लेने इसलिए नहीं जा पाया हूं, क्योंकि लॉकडाउन है। लॉकडाउन खुलते ही सबसे पहले अस्थियां लेने जाएंगे। घर में अस्थियां नहीं ला सकते। इसलिए हमें इस मजबूरी से गुजरना पड़ रहा है।
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विद्युत शवदाह गृह, ताजगंज - फोटो : अमर उजाला
आवास विकास कॉलोनी निवासी व्यक्ति के पिता की 28 अप्रैल को मृत्यु हो गई थी। परिवार में सभी व्यक्ति बीमार हैं। होम आइसोलेशन में हैं। पिता को मुखाग्नि देने के बाद वह भी बीमार हो गए। उन्होंने विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी को फोन पर इस बारे में सूचित किया। कहा है कि परिवार के किसी व्यक्ति के स्वस्थ होने पर वह अस्थि कलश को ले जाएंगे। उन्होंने पिता के अस्थि कलश को संभालकर रखने का अनुरोध किया है।
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ताजगंज श्मशान घाट पर जलतीं चिताएं - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के बाद ले जाएंगे अस्थियां
विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी संजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि अंतिम संस्कार के बाद पंद्रह से बीस प्रतिशत लोगों की अस्थियां रखी हुई हैं। कई परिवारों से यह फोन भी आया है कि लॉकडाउन खुलने के बाद अस्थियों को विर्सजन के लिए गंगा जी ले जाएंगे। 

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शमशान घाट पर एकत्रित अस्थियां (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
अस्थि कलश पूरी तरह सुरक्षित
क्षेत्र बजाजा कमेटी ने सभी अस्थि कलशों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा हुआ है। हम जानते हैं कि जिन परिवारों में मौत हुई है, वह उस पीड़ा से उबर नहीं पा रहे हैं। इसलिए जब भी कोई अस्थियां लेने आएंगे, तो उन्हें दे दी जाएगी। - अशोक गोयल, अध्यक्ष, क्षेत्र बजाजा कमेटी
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ताजगंज श्मशान घाट पर जलतीं चिताएं - फोटो : अमर उजाला
लावारिस शवों का हुआ अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार के लिए बीस शव ऐसे पहुंचे है जो लावारिस हैं। इनकी अस्थियों को भी क्षेत्र बजाजा कमेटी ने संभाल कर रखा है। थाने से अगर किसी परिवार को अस्थियां देने का आदेश आता है, तो अस्थि कलश उन्हें सौंप दिए जाएंगे। - राजीव अग्रवाल, महामंत्री, क्षेत्र बजाजा कमेटी 
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सोरों के हरिपदी घाट - फोटो : अमर उजाला
पहली बार टूट रही है परंपराएं
आचार्य पं. सुभाष चंद्र शास्त्री का कहना है कि अस्थि विसर्जन पुराणों में 10 दिन की अवधि बताया गया है। इसके बाद भी देशकाल और परिस्थिति के अनुसार भी विसर्जन कर सकते है। अगर कोई कोरोना महामारी के चलते या अन्य किसी कारण से विसर्जन नहीं कर सकते, तो अपने पुरोहित या मित्र व किसी अन्य से भी विसर्जन करा सकते है। पं. शास्त्री बताते हैं कि अस्थियां जितने दिन गंगा जी में वास करती हैं, उतने वर्ष पितृ स्वर्ग में वास करते है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब अस्थि विसर्जन की परंपरा टूट रही है।

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