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Engineers Day 2020: इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है ताजमहल, भूकंप भी कुछ न बिगाड़ पाया

Tue, 15 Sep 2020 09:47 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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ताजमहल आगरा - फोटो : अमर उजाला
Engineers Day 2020: 372 साल पहले बनकर तैयार हुआ दुनिया का सातवां अजूबा ताजमहल इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। अभियंता दिवस पर ताजमहल के आर्किटेक्ट और इंजीनियरिंग की तुलना बेमानी है। निर्माण के 372 वर्षों में ताजमहल ने भूकंप और बाढ़ का कहर झेला है, लेकिन उनसे बेअसर रहा। देश के जाने माने नींव विशेषज्ञ प्रोफेसर एस. सी. हांडा के मुताबिक ताजमहल जैसी दुनिया में कोई इमारत नहीं। ताज की नींव भूकंप के झटके झेलने लायक है। इंजीनियरों के मुताबिक ताज सदियों तक बना रहेगा। 
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ताजमहल - फोटो : Amar Ujala
ककैया ईंटों की बनी हैं दीवारें
आईआईटी रुड़की के रिटायर्ड प्रोफेसर एवं नींव विशेषज्ञ डॉ. एससी हांडा ने बताया कि ताजमहल की दीवारें ककैया ईंटों की हैं और चूना पत्थर से जुड़ी हैं। चूना पत्थर के साथ गुड़ और कई चीजें इस्तेमाल की हैं, जो समय के साथ और मजबूत हो चुकी हैं। ऐसे में कम से कम 200 से 300 साल तक ताजमहल को कोई खतरा नहीं है। इसकी नींव काफी मजबूत है और बड़े से बड़ा भूकंप भी इसे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा।
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ताजमहल - फोटो : Amar Ujala
ताजमहल जैसी कोई इमारत नहीं
आर्किटेक्ट एसोसिएशन के समीर गुप्ता ने बताया कि दुनिया में ताजमहल जैसी कोई इमारत नहीं है, जो इंजीनियरिंग के लिहाज से बेजोड़ हो। पर्यावरण और भूकंप का असर इस पर ना हुआ तो कम से कम 500 साल तक इसे कोई खतरा नहीं है। इसमें निर्माण की ऐसी तकनीक इस्तेमाल की गई है कि भूकंप झेल लेगी। ताज की नींव और उसकी डिजाइनिंग दमदार है। 

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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
भूकंप भी ताज का कुछ न बिगाड़ पाया 
साल 1803 में भूकंप की वजह से सबसे पहले ताजमहल की मीनारों और कब्र की फर्श पर दरार आ गई थी। उस वक्त चांदी पिघलाकर इनको भरा गया था। एएसआई की साल 1925-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1905 में आए भूकंप की वजह से ताजमहल की दक्षिणी दीवार और सामने के पत्थर में दरार पड़ गई थी। हालांकि उसे जल्द ही भर दिया गया था। 
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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण (एएसआई) की साल 1935-36 की रिपोर्ट के अनुसार, ताजमहल को भूकंप का सबसे तेज झटका 15 जनवरी, 1934 को लगा था। इसमें मस्जिद के कई लाल पत्थर गिर गए। उस वक्त भी भूकंप का केंद्र नेपाल था और तीव्रता 8.3 आंकी गई थी। तब ताजमहल की मस्जिद की मरम्मत में 26,951 रुपये खर्च हुए थे। पांच साल पहले नेपाल में अप्रैल में आये 7.9 तीव्रता के भूकंप में ताज के कुछ पत्थर ही गिरे थे।
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