मैनपुरी लोकसभा सीट पर सियासी जंग बेहद रोचक मोड़ पर है। मुलायम सिंह यादव की विरासत इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा है। अन्य मुद्दे गायब हैं। सियासी मैदान में सपा और भाजपा के बीच इमोशनल जंग छिड़ी हुई है।
मैनपुरी के मतदाता करीब 18 महीनों के लिए अपना सांसद चुनने जा रहे हैं। इस लोकसभा का कार्यकाल मई 2024 में खत्म हो जाएगा। इस उपचुनाव में कोई मुद्दा नहीं है। सिर्फ मुलायम के नाम पर चुनाव लड़ा जा रहा है। मुलायम की सियासी विरासत ही यहां सबसे बड़ा मुद्दा है।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पार्टी की प्रत्याशी डिंपल यादव जब नामांकन करने पहुंची थीं तब उनकी जुबां पर सिर्फ मुलायम सिंह का ही नाम था। अखिलेश यादव भी स्वर्गीय मुलायम सिंह का ही नाम लेते रहे। वहीं भाजपा के प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य ने भी खुद को मुलायम सिंह यादव का शिष्य बताते हुए नामांकन दाखिल किया।
विज्ञापन
2 of 7
डिंपल यादव और रघुराज शाक्य
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा ने बड़ा दांव खेलते हुए रघुराज सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है। रघुराज भी मुलायम के ही शिष्य हैं। टिकट फाइनल होने के बाद जब वो मैनपुरी आए तब उनकी बात भी मुलायम से ही शुरू हुई। बेहिचक कहा कि मुलायम उनके गुरु हैं। यहां तक कहा कि विरासत पर पुत्र का नहीं शिष्य का अधिकार होता है। इतना ही नहीं नामांकन करने से पूर्व वो सबसे पहले मुलायम सिंह के समाधी स्थल पर गए।
विज्ञापन
3 of 7
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
तस्वीर साफ है सपा मुलायम सिंह को लेकर सियासत की जमीन पर इमोशनल कार्ड खेल रही है तो भाजपा भी मुलायम को भूल नहीं पा रही है। इस चुनाव से स्थानीय मुद्दे गायब हैं। सड़क, बिजली, पानी, सुरक्षा, सेहत से जुड़े मुद्दे फिलहाल एक किनारे हैं। बात सिर्फ मुलायम की विरासत की हो रही है।
4 of 7
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
यकीनन मैनपुरी सपा का मजबूत किला रहा है और एक बार भी इस लोकसभा से भाजपा जीत नहीं पाई है। चूंकि यह चुनाव मुलायम के नाम पर हो रहा है तो भाजपा भी आक्रामक होने की बजाय मुलायम के अपमान का जिक्र करके सैफई परिवार को घेर रही है।
विज्ञापन
5 of 7
पूर्व विधायक हरिओम यादव
- फोटो : अमर उजाला
दिवंगत मुलायम सिंह यादव के समधी और पूर्व विधायक भाजपा नेता हरिओम यादव कहते हैं कि जिन लोगों ने नेताजी का अपमान किया और छल से पार्टी हथिया ली, उन्हें नेताजी की विरासत पर राजनीति करना शोभा नहीं देता।
विज्ञापन
6 of 7
अभिनेता राजबब्बर
- फोटो : अमर उजाला
2009 में फिरोजाबाद संसदीय सीट से फिल्म अभिनेता राजबब्बर ने डिंपल यादव को हराया था। राजबब्बर भी लंबे समय तक मुलायम से साथ ही रहे थे। यूं भी कहा जा सकता है राज बब्बर ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत मुलायम सिंह यादव के साथ ही शुरू की थी।
जब अमर सिंह से राजबब्बर तकरार हुई तब 2008 में वह सपा से अलग हुए थे। 2009 के उपचुनाव में डिंपल को कड़ी टक्कर देकर भारी मतों से पराजित किया। अब मैनपुरी से डिंपल उपचुनाव में लड़ रहीं हैं, तो उनके सामने मुलायम के ही शिष्य रघुराज सिंह शाक्य हैं।