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सर्कस से मुक्त हाथियों ने मनाई आजादी की पांचवीं वर्षगांठ, केक खाया, पानी में की मस्ती

Mon, 18 May 2020 12:00 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

चार हाथियों ने केक खा कर मनाई स्वतंत्रता की पांचवीं वर्षगांठ

 
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स्वतंत्रता की पांचवी वर्षगांठ पर केक खाते सर्कस से रेस्क्यू किए हाथी - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
सर्कस में करतब दिखाने वाले सबसे कम उम्र के हाथी, मैकेडेमिया (मैक), वॉलनट (वॉली), कोकोनट (कोको) और पीनट ने अपनी आजादी की पांचवी वर्षगांठ मनाई। वाइल्डलाइफ एसओएस ने इन्हें पांच साल पहले रेस्क्यू किया था। कई वर्ष तक सर्कस में करतब दिखाने के कारण इन हाथियों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा था। साल 2015 में एक सर्कस से रेस्क्यू करने के बाद चारों ने मथुरा स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में एक नया जीवन शुरू किया। 
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हाथियों के लिए बनाई गई केक - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
युवा हाथियों को अक्सर उनकी जिंदादिली और फुर्तीले स्वभाव के लिए जाना जाता है, लेकिन वर्षों के दुर्व्यवहार ने इन चारों हाथियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर पीड़ा देने वाले निशान छोड़ दिए थे। आज, 'नट हर्ड' जैसा कि उन्हें प्यार से बुलाया जाता है, ने अपने दर्दनाक इतिहास को पीछे छोड़ दिया है और हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र, मथुरा में एक सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। 11 साल की पीनट वाइल्डलाइफ एसओएस की देखरेख में सबसे कम उम्र की हथिनी है और वह सबसे शरारती भी है। उसका 17 वर्षीय कोकोनट के साथ एक बहुत ही करीबी रिश्ता है, जो अक्सर पीनट के लिए सुरक्षात्मक, बड़ी बहन की भूमिका निभाती है। दोनों हथिनी में एक अटूट बंधन हैं और दोनों ही अक्सर गर्मियों में नदी में तैरने का आनंद एक साथ उठाती हैं।

 
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हाथियों के लिए बनाई गई केक - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
27 वर्षीय मैक और 23 वर्षीय वॉली अब स्वस्थ नर हाथी हैं, उनके बाड़े में अलग-अलग और बड़े पानी के पूल हैं, जिसमें वे अक्सर डुबकी लगाते हैं। उनके बाड़े में संरचनात्मक रूप से तैयार किये गए एनरिच्मेंट (खेल के साधन) है जो कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ और उत्तेजित रखने में सहायता करते हैं। नट-हर्ड की पांचवीं स्वतंत्रता वर्षगांठ मनाने के लिए, वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों और हाथी की देखभाल करने वाले स्टाफ ने विशेष रूप से दाल, फल, चारा, सब्जियों आदि से केक तैयार किया, जिसे कोको, पीनट, मैक और वॉली ने बड़े ही चाव से स्वाद लेकर खाया।

 

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मैदान में चारा खाते हाथी - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
डॉ. यदुराज खड़पेकर, वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सा सेवाओं के सहायक निदेशक ने कहा, पीनट और कोकोनट बहुत चंचल हैं। यह बड़े ही मन से अपने बाड़े में तैयार किए एनरिच्मेंट (खेल के साधन) के साथ खेलने का आनंद लेती हैं, क्योंकि वह थोड़ी ज्यादा शैतान हैं इसलिए वह बनाए गए एनरिच्मेंट को बहुत ही जल्दी तोड़ भी देती हैं, जिसके बाद उनके कीपर को वह दुबारा बनाना पड़ता है। वॉली और मैक वर्तमान में मस्थ में हैं, जिस कारण उनका व्यवहार थोडा अप्रत्याशित है।
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हाथी संरक्षण केंद्र में हाथी - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ और सह-संस्थापक, कार्तिक सत्यनारायण का कहना है कि नट हर्ड वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा रेस्क्यू किया गया सबसे बड़ा और सबसे कम उम्र के हाथियों का समूह है। हमें अपने सेंटर में चार युवा हाथियों को अच्छे से रखने के लिए पूरी तरह से पुनः सुधार करने पड़े थे, क्योंकि हमें पता था की उनके बड़े होने पर उन्हें अधिक स्थान और संसाधनों की आवश्यकता होगी। इन चारों हाथियों की इस यात्रा का हिस्सा बनना एक अद्भुत अनुभव रहा है। 
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पानी में मस्ती करता छोटा हाथी - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी का कहना है कि यह देखकर बेहद खुशी होती है कि कुछ साल में ही निरंतर प्यार और देखभाल की वजह से हम इन हाथियों के जीवन महत्वपूर्ण सुधार ला पाए हैं। आज लुप्तप्राय प्रजाति दिवस है और इन चार हाथियों की रेस्क्यू की सालगिरह का जश्न मनाने का इससे अच्छा दिन और बेहतर तरीका नहीं हो सकता था। भारत में कुल 23,000 से 27,000 एशियाई हाथियों की आबादी है। इस संपूर्ण प्रजाति का अस्तित्व भारत में इसके अस्तित्व के साथ जुड़ा हुआ है।
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