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ब्रज में भीषण गर्मी से हाथी भी हुए बेहाल: राहत पाने के लिए स्विमिंग पूल में गोते लगा रहे 'गजराज'

Fri, 02 Jul 2021 12:08 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा - मथुरा
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स्विमिंग पूल में हाथी - फोटो : Wildlife SOS
आगरा और मथुरा समेत पूरे ब्रज में मौसम का पारा चढ़ा हुआ है, जिससे सुबह नौ बजे से ही सूरज आग उगलने लगता है। दोपहर में तो आसमान से अंगारे बरसते हैं। इस कदर गर्मी पड़ रहा है कि इंसान ही नहीं पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। ऐसे में मथुरा के फरह स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए 'गजराज' गोता लगा रहे हैं। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए वाइल्डलाइफ एसओएस ने हाथियों के लिए आजीवन देखभाल के तहत अद्भुत व्यवस्थाएं की हैं। एनजीओ के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में सभी 29 हाथियों के पास अपने स्वयं के जंबो स्विमिंग पूल के साथ-साथ पानी की छिड़काव के लिए स्प्रिंकलर भी हैं, जो कि उनके बड़े-बड़े बाड़ों को ठंडा रखने में मदद कर रहे हैं।


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स्विमिंग पूल में नहाता हाथी - फोटो : Wildlife SOS
संरक्षण केंद्र में हाथी अपने स्विमिंग पूल में समय बिताते हुए भरपूर आनंद लेते हैं। जहां बूढ़े हाथी, ठंडे ताजा पानी में आराम से घंटों बिताना पसंद करते हैं, वहीं कुछ हाथी जैसे की चंचल, पीनट, कोकोनट और लक्ष्मी ऐसे भी हैं, जो पानी में गोते लगाते हैं और पूल के अंदर रबर के टायरों के साथ खेलते हुए दिखाई देते हैं। यह पूल 400 वर्ग फीट और छह फीट गहरे हैं। इनके अंदर आसानी से जाने के लिए प्रत्येक पूल में एक झुका हुआ रैंप है। गर्मी से राहत प्रदान करने के अलावा पानी हाथियों के पैरों से अपने भारी वजन को कम करने में भी मदद करता है, जिससे उन्हें आराम करने में मदद मिल सके।
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जंबो हाइड्रोथेरेपी पूल में हाथी - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में हाथियों के लिए भारत का पहला जंबो हाइड्रोथेरेपी पूल भी है। हाइड्रोथेरेपी हाथियों के दर्द भरे जोड़ों और पैरों के लिए एक प्रभावी उपचार है, जो की पानी के चिकित्सीय लाभों का उपयोग करते हुए ट्रीटमेंट का ही एक रूप है, जिससे उन्हें शारीरिक रूप से आराम मिल सके। हाइड्रोथेरेपी मांसपेशियों के दर्द से राहत देने के साथ-साथ मांसपेशियों को प्राकृतिक तरीके से पुनर्निर्माण में मदद करता है। हाइड्रोथेरेपी पूल 11 फीट गहरा है और इसमें 21 हाई प्रेशर वाले जेट स्प्रे लगे हैं, जो पानी को प्रेशर से फेकते हैं, जिससे हाथियों के पैरों और शरीर की मालिश हो सके और रक्त संचार को बढ़ाने में मदद मिल सके। 

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हाथी संरक्षण केंद्र स्थित तालाब में बैठे हाथी - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी सेंटर में लाए गए हाथियों को सर्कस में प्रदर्शनी, पर्यटकों की सवारी, सड़कों पर भीख मांगने और शादी एवं बारात आदि में इस्तेमाल होने जैसी अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों से बचाया गया है। इन हाथियों को ऐसे वातावरण में रखा गया जो कि उनके शरीर के लिए नहीं बना है या फिर उन्हें कंक्रीट पर घंटों तक जंजीर में बांध कर रखा गया, जिसकी वजह से कम उम्र में ही इन्हें आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियां ने जकड लिया, जिसके कारण वह ज्यादा देर तक खड़े होने या चलने में अत्यधिक दर्द महसूस करते हैं।
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जंबो हाइड्रोथेरेपी पूल में नहाता हाथी - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु-चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ इलियाराजा ने बताया कि जंबो पूल के साथ-साथ हाथियों को गर्मियों से राहत दिलाने के लिए उपयुक्त आहार दिया जा रहा है, जिसमें तरबूज, खरबूज, खीरे, मौसमी जैसे फल और सब्ज़ी शामिल हैं, जो उन्हें हाइड्रेटीड रखने में मदद करते हैं। हम हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन को रोकने के लिए ग्लूकोज का पानी, इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन और हर्बल दवाएं भी दे रहे हैं।
 
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यमुना नदी में नहाता हाथी - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि कैद में रहे इन हाथियों को उनके अस्तित्व के लिए आवश्यक मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित कर दिया जाता है। आज यह देखकर हमें सुकून मिलता है कि हमारे प्रयासों से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। एनजीओ के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा कि हाथी पूल में घंटों बिताते हैं, और उन्हें पानी में आराम करते देखना हमारे दिल को खुशी से भर देता है। हम उन्हें यमुना नदी में भी ले जाते हैं, जिसका वे भरपूर आनंद उठाते हैं और कुछ हाथी तो पानी में अठ्खेलियां भी करते हैं।
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