माता-पिता को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। इनकी सेवा किसी तीर्थ से कम नहीं होती, लेकिन आज के दौर में कुछ बेटे बूढ़े मां-बाप को बोझ समझने लगे हैं। बेटे अपने आलीशान मकान में किरायेदार रख सकता है, लेकिन बूढ़े मां-बाप के लिए जगह नहीं है। यही वजह है कि वृद्धाश्रमों में दिन-ब-दिन बुजुर्गों की संख्या बढ़ती जा रही है। आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम में रह रहे कुछ ऐसे ही बुजुर्ग मां-बाप ने अपना दर्द अमर उजाला से साझा किया। उनका कहना है कि बहू और बेटों ने गैरों जैसा व्यवहार किया और घर से निकाल दिया।
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बुजुर्ग उमेश चंद्र
- फोटो : अमर उजाला
नाई की मंडी के रहने वाले उमेश चंद्र की कहानी दर्दभरी है। जिस बेटे की एक मुस्कान के लिए छोटी-मोटी खुशियों को चुराया। उसी बेटे ने पिता को चोरी का इल्जाम लगाकर घर से निकाल दिया। बेटे के दो मकान हैं, लेकिन पिता वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर हैं। उनका कहना है कि बेटा घर में किरायदार तो रख सकता है पर पिता को नहीं रख सकता है। पहले तो कभी-कभी मिलने आ जाया करता था लेकिन अब तो वह मिलने भी नहीं आता। कभी-कभी बेटी मिलने के लिए आ जाती है, उसमें भी बेटा आपत्ति जताता है।
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रामलाल वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग
- फोटो : अमर उजाला
अर्जुन नगर के सुनहरीलाल वर्मा के तीन बेटे हैं। एक बेटा विदेश में रहता है। सुल्तानपुरा में सराफा की दुकान है। सब कुछ था। जिन बेटों के लिए उन्होंने धन संपत्ति इकट्ठा की। उन्हीं बेटों ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद सुनहरीलाल को रामलाल वृद्धाश्रम में शरण लेनी पड़ी। उनका कहना है कि कारोबार हाथ में आने के बाद बेटे गैरों जैसा व्यवहार करने लगे। उनको न तो समय से खाना मिलता और न ही बीमार होने पर दवाएं। कभी-कभी बेटे मिलने आते हैं लेकिन, उनसे नहीं मिलता, क्योंकि ऐसे बेटों से क्या मिलना जिसके जीवन में पिता का कोई महत्व ही न हो।
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पत्नी कमलेश गुप्ता के साथ भगवान स्वरूप गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
शहर में तीन मकान, एक दुकान के मालिक हैं भगवान स्वरूप गुप्ता। लेकिन समय बदला और आज दोनों पति-पत्नी वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर हैं। बहू तो गाली-गलौज करती थी। बेटा भी मां-बाप को मारने के लिए रिवाल्वर तान देता था। बेटे ने दोनों को यह कह कर घर से बाहर निकाल दिया कि उसके घर में उनके लिए कोई जगह नहीं है। उनका कहना है कि बहू और बेटे ने प्रॉपर्टी के लिए मेरा मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवा लिया। एक दो बार बेटा मिलने आया है लेकिन हम उसे मिलने से मना कर देते हैं।
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राजेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी ओमवती
- फोटो : अमर उजाला
टेड़ी बगिया के रहने वाले राजेंद्र शर्मा और पत्नी ओमवती का अपना मकान और दुकान है। लेकिन माता-पिता को बेटा अपने साथ नहीं रखता। बहू ने दोनों से एक दिन कहा कि कमरे में बंद करके केरोसिन डालकर आग लगा देगी। जिसे उसका पीछा छूट जाए। अपनों की दुत्कार और उत्पीड़न से आजिज आकर बुजुर्ग दंपती को अपना घर छोड़कर आश्रम में आश्रय लेनी पड़ी। दंपती का कहना है कि हमें बहू के व्यवहार से कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जब हमारे बेटे ने साथ नहीं दिया तो हम वहां कैसे रह सकते थे।
रामलाल वृद्धाश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि आश्रम में शहर के ऐसे बहुत से बुजुर्ग हैं, जो संपन्न परिवार से हैं। जिनके बेटों के पास पैसों की कमी नहीं है लेकिन वह अपने मां-बाप को साथ नहीं रखते। आश्रम में लगातार ऐसे बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।