बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है। राम ने इसी दिन रावण का वध करके अनाचार, अत्याचार और अंधकार पर विजय की स्थापनी की। यह संदेश दिया कि अपने पुरुषार्थ और श्रेष्ठ आचरण से इंसान खुद अपनी दुनिया का सृजन कर सकता है, जिसमें सभी सुखी और खुशहाल रहें।
आगरा के आरबीएस कॉलेज के मानव संसाधन प्रबंधन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डीएस यादव ने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन की हर लीला में एक सीख है। अगर हम इन्हें अपने जीवन में उतार लें तो शहर और समाज की समस्याओं पर विजय संभव है और तभी सही मायने में विजयदशमी होगी।
अहिल्या का उद्धार: गलती इंद्र की थी, सजा अहिल्या को मिली थी। पति गौतम ऋषि के श्राप से वह पत्थर की हो गईं थीं। राम ने उनका उद्धार कर उनके साथ न्याय किया।
सीख : हमारे शहर में ऐसी अनेक नारी हैं जो दूसरे के छल की सजा भुगत रही है। इन्हें न्याय दिलाने के लिए हमें आगे आना चाहिए।
परशुराम का क्रोध शांत करना: शिव धनुष भंग होने पर परशुराम क्रोधित थे। राम ने क्रोध नहीं दिखाया, विनम्रता का परिचय दिया। उनका विनम्र स्वभाव महर्षि को अच्छा लगा, उनका क्रोध शांत हुआ।
सीख: हमें चाहिए कि हम क्रोध से बचें, अपने अच्छे गुण हर स्थिति में बनाए रखें। विनम्रता को कभी नहीं त्यागना चाहिए।
वन गमन: पिता की आज्ञा का हृदय से पालन कर राम वन को गए। वहां सबके साथ समानता व्यवहार किया, इससे उनका हृदय जीत लिया।
सीख : हमें बड़ों का सम्मान करना चाहिए। जात-पात, ऊंच नीच में न पड़कर सभी का सम्मान करना चाहिए, तभी हमारे शहर की सामाजिक प्रगति होगी।
भरत को राज्य: पिता की आज्ञा मानी। भाई को खुशी-खुशी राज्य दे दिया। यह त्याग की भावना है।
सीख : भाइयों के बीच संपत्ति के विवाद हो रहे हैं, खून तक किए जा रहे हैं। भाई-भाई के बीच प्रेम नहीं। राम और भरत जैसा प्रेम हो, तो कोई झगड़ा ही न हो।
केवट की मदद लेना: राम ने केवट को मान दिया। उनकी मदद ली। तभी तो राम को दीनबंधु कहा गया। केवट ने पांव पखारने की शर्त रखी, तो राम ने मान ली।
सीख : हमें भी सभी को साथ लेकर चलना चाहिए, तभी हमारे जीवन की नैया पार लग सकती है। जिसकी जैसी क्षमता है, उससे वैसा ही सहयोग लिया जाए।
वानरों से सहयोग: यह राम के प्रबंधन के कौशल को दर्शाता है। हम राम को मैनेजमेंट का मास्टर कह सकते हैं। वानरों की मदद से रावण की विशाल सेना को पराजित कर दिया।
सीख : अगर हम चीजों का सही प्रबंधन करें, लोगों के गुणों को निखारें, उन्हें आगे बढ़ाएं तो, जिन्हें कमजोर समझा जाता है, वे भी बड़े काम कर सकते हैं।
विभीषण और सुग्रीम से मित्रता: राम ने दोनों को वचन दिया राज दिलाने का, उसे निभाया। उनके अधिकार दिलाए। सच्चा मित्रता का उदाहरण पेश किया।
सीख : हमारे दोस्तों पर अगर कोई आपत्ति आए, कोई उनका अधिकार छीन ले, तो हमें उनका साथ देना चाहिए, चाहें परिणाम कुछ भी हो, डरना नहीं चाहिए।
शबरी के जूठे बेर : शबरी भील जाति से थीं। पशु बलि की परंपरा के विरोध में थीं। इस कारण घर छोड़ना पड़ा। राम ने उनके जूठे बेर खाए।
सीख : जो लोग समाज में मूल्यों रक्षा के लिए उपेक्षित हों, उनकी धर्म और जाति देखे बगैर हमें उन्हें सम्मान देना चाहिए।
शिवलिंग स्थापना: राम ने समुद्र को पार करने से पूर्व रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की।
सीख : हमें अपने आराध्य को हमेशा अपने साथ रखना चाहिए। कोई भी कार्य प्रारंभ करने से पहले उनकी पूजा करें।
रावण वध: रावण ने पाप किया, भगवान ने उसे दंड दिया। काम मुश्किल था, लेकिन उसे अंजाम तक पहुंचाया।
सीख : हम भी जो प्रण ले, उसे पूरा करें, मुश्किलें कितनी ही आएं लेकिन लक्ष्य प्राप्ति तक रुके नहीं।