नवरात्र भर मैया का गुणगान करने के बाद मंगलवार को दशमी पर मैया को विदा किया गया। मां से मंगल कामना करने के बाद बाजे-गाजे के साथ विसर्जन यात्रा निकाली गई। यमुना किनारे बनाए गए कुंडों में प्रतिमा का विसर्जन हुआ।
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देवी की विसर्जन यात्रा में शामिल श्रद्घालु
- फोटो : अमर उजाला
शहर में हाथी घाट, मनोहरपुर, कैलाश घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला दिखा। दिन भर मैया के जयकारे गूंजते रहे। देवी गीतों की धुन पर श्रद्धालु मदमस्त होकर झूमते-नाचते विसर्जन यात्रा में चल रहे थे। शहर की हर गली से देवी की विसर्जन यात्रा निकल रही थी। जगह-जगह लाउड स्पीकर बज रहे थे। विसर्जन यात्रा में महिलाओं की तादात पुरुषों की अपेक्षा काफी अधिक दिखाई दी।
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देवी की विसर्जन यात्रा में शामिल श्रद्घालु
- फोटो : अमर उजाला
भक्ति का खुमार ऐसा कि महिलाएं नंगे पांव, सिर पर कलश लिए हुए, मैया के जयकारे लगाते और नाचते-गाते आगे बढ़ रही थी। रंग-गुलाल उड़ाए जा रहे थे। देवी की प्रतिमा बैलगाड़ी, घोड़ा गाड़ी, ट्रैक्टर, ट्रक और ठेले पर निकाली गई। पूरे रास्ते लोग नाचते-गाते और देवी के जयकारे लगाते रहे। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम थे। नदी में प्रतिमा विसर्जन करने से रोका जा रहा था।
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देवी की विसर्जन यात्रा में झूमते श्रद्घालु
- फोटो : अमर उजाला
विसर्जन यात्रा के दौरान बैंड पर ‘मैं बरसाने की छोरी न कर जोरा जोरी, मैं गोरी और तू कारौ अपनो मेल नहीं’, ‘मैया का चोला है रंग लाल’, ‘रात जगाऊं कैला मैया की।’ ‘शेरो वाली का चोला है रंग लाल, मैया का चोला है रंग लाल’ आदि गीत बजे रहे थे। इनकी धुनों पर भक्त झूमते हुए घाटों की ओर बढ़ रहे थे।
विसर्जन यात्रा के साथ धीमी गति से चलते वाहन
- फोटो : अमर उजाला
शहर में यातायात व्यवस्था ने सभी को परेशान किया। रूट डायवर्जन न होने से यमुना किनारा रोड पर जाम की स्थिति बनी रही। विसर्जन यात्रा के साथ वाहन रेंगते हुए चल रहे थे।