अगर आपके घर जल संस्थान से पानी की सप्लाई आती है तो आप इसे देखभाल कर ही इस्तेमाल करें। आगरा के कई हिस्सों में गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है। यमुना पार में पानी में कीड़े तक निकल रहे हैं। जिन सीडब्ल्यूआर से इस पानी की सप्लाई की जाती है, अगर उसकी पड़ताल अधिकारी और जनप्रतिनिधि करें तो शायद उनके मुंह से यही निकलेगा, हे भगवान, ये क्या हो रहा है? अमर उजाला टीम ने जब पानी को लेकर पड़ताल की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है।
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पानी के टैंक की टूटी छत पर खड़ा आवारा कुत्ता
- फोटो : अमर उजाला
पहले तो जल संस्थान लोगों तक पीने का पानी ही नहीं पहुंचा पा रहा है, अगर कहीं पानी पहुंच भी रहा है तो वो गंदा होता है। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि गंदे पानी की वजह जर्जर हो चुका पानी को साफ करने वाले संयंत्र है। दरअसल, जर्जर सीडब्ल्यूआर यानी स्वच्छ पानी के जलाशय में गंदगी तैर रही है। कहीं अंडे पड़े हैं तो कहीं कीड़े मकोड़े। रकाबगंज, शाहगंज प्रथम और द्वितीय, नौलक्खा के सीडब्ल्यूआर में यही स्थिति है।
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रकाबगंज में पानी के टैंक की टूटी छत पर पड़ा तिरपाल
- फोटो : अमर उजाला
रविवार दोपहर को अमर उजाला की टीम रकाबगंज के जोनल पंपिंग स्टेशन पहुंची। यहां से ईदगाह, बिजलीघर, मोहनपुरा, बालूगंज, रकाबगंज, आदर्श नगर आदि को क्षेत्र को पानी की सप्लाई की जाती है। साढ़े चार मीटर गहरे दो सीडब्ल्यूआर हैं। इनमें से एक की छत कई वर्ष पूर्व ही टूट चुकी है। सीडब्ल्यूआर में एकत्रित पानी में अंडे, पॉलिथीन, कोल्डड्रिंक की बोतल तैर रही हैं।
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नौलक्खा में पानी के टैंक के ऊपर लगा तिरपाल भी फट चुका है
- फोटो : अमर उजाला
जोनल पंपिग स्टेशन नौलक्खा सदर से मधु नगर, बिंदू कटरा, छावनी बोर्ड, सदर, एमईएस, एडीआरडी क्षेत्रों में सुबह छह और शाम को ढाई घंटे पानी की सप्लाई होती है। यहां चार मीटर गहरा सीडब्ल्यूआर है, जिसकी छत पूरी तरह से गिर चुकी है। हालांकि, तिरपाल से छत को ढकने की कोशिश की गई है, लेकिन सफलता नहीं मिली है, जिसके चलते सीडब्ल्यूआर में एकत्रित पानी में काई दिख रही है। पानी में झाग है, कीड़े भी देखने को मिले।
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पानी के टैंक की टूटी छत
- फोटो : अमर उजाला
जोनल पंपिग स्टेशन शाहगंज प्रथम से रूई की मंडी, भोगीपुरा, चिल्ली पाड़ा, ईदगाह कॉलोनी, नगला छउआ, रोडवेज कॉलोनी, शाहगंज, पुलिस लाइन, सोरो कटरा, पंचकुइयां, नगला मोहन आदि क्षेत्रों में पानी की सप्लाई की जाती है। यहां पांच मीटर गहरा सीडब्ल्यूआर है, जिसकी छत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है, उस पर टीन डाली गई है, बावजूद इसके पानी में गंदगी का साम्राज्य है।
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पानी के टैंक में पड़ा अंडा व गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
रकाबगंज स्थित पंपिंग स्टेशन के ऑपरेटर राजेश शंकर ने बताया कि कई सालों से सीडब्ल्यूआर की छत क्षतिग्रस्त है। ऊपर चढ़ने की हिम्मत नहीं होती है। 25 अक्तूबर 2018 को सफाई हुई थी। नौलक्खा के ऑपरेटर सोमदत्त ने बताया कि दस साल पहले सीडब्ल्यूआर की छत गिर गई थी। पांच मीटर गहराई होने की वजह से सफाई नहीं हो पाती है।
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पानी में पड़ी पॉलिथीन और गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
जल संस्थान के सचिव अनवर ख्वाजा का कहना है कि मुझे जानकारी नहीं है। मेरे क्षेत्र में नहीं है, इस संबंध में संबंधित अधिशासी अभियंता से बात की जाए। वहीं बता पाएंगे कि क्या योजना है। अधिशासी अभियंता योगेश श्रीवास्तव ने कहा कि नौलक्खा में सीडब्ल्यूआर का निर्माण हो रहा है। दो माह में वह काम करना शुरू कर देगा। बाकी अन्य सीडब्ल्यूआर के लिए जल निगम ने एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। स्वीकृति मिलने पर कार्य होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष हम लोग जल मूल्य अदा करते हैं। इसके बावजूद पानी नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में जो पानी मिल रहा है, अगर उसे पी लिया जाए तो अस्पताल में ही भर्ती होना पड़ेगा। इसलिए जल संस्थान के पानी को पीना तो दूर हाथ पैर तक नहीं धो रहे हैं। लोगों ने जल संस्थान से साफ और शुद्ध पानी मुहैया कराए जाने की मांग की है।