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UP: वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए थे...ताबूत में लाैटे, चार लाशों को देख फट पड़ा कलेजा; हर किसी की आंखें हुईं नम

Sun, 31 Aug 2025 05:14 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

वैष्णो देवी दर्शन के लिए गया आगरा का परिवार भूस्खलन की चपेट में आ गया। इसमें चार लोगों की माैत हो गई। जम्मू से शव घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। ताबूत में अपनों को देख परिजनों का कलेजा फट पड़ा।
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वैष्णो देवी भूस्खलन में आगरा के चार लोगों की माैत। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिन अपनों को वैष्णो माता के दर्शन के लिए हंसी-खुशी विदा किया था, शनिवार को जब वे ताबूत में बंद आए तो परिजन के साथ पूरे कुम्हारपाड़ा में लोग गमगीन हो गए। मां-पिता सहित चार लोगों के शव देखकर बेटियां बेहोश हो गईं। बेटे का बुरा हाल हो गया। चीत्कार मची तो हर कोई रो पड़ा। जम्मू में भूस्खलन में मृत जूता कारीगर अर्जुन सिंह, उनकी पत्नी सुनीता, पौत्री 11 महीने की सेजल और बेटे की साली 12 साल की भावना के शव शनिवार शाम को घर लाए गए। 

 
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परिजनों का फट पड़ा कलेजा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रकाबगंज थाने के समीप स्थित कुम्हारपाड़ा के अर्जुन सिंह 24 अगस्त को बेटे दीपक की बेटियों 3 साल की एंजेल और 11 महीने की सेजल का मुंडन करने के लिए वैष्णो माता के मंदिर गए थे।उनके साथ में बेटे दीपक, पत्नी सुनीता, पुत्रवधू मोना के अलावा बेटी यासमीन, दामाद मोहित कुमार, बेटे की साली 12 वर्षीय भावना भी थीं। 

 
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ताबूत में पहुंचे शव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
26 अगस्त को भूस्खलन होने की वजह से पूरा परिवार हादसे का शिकार हो गया। बेटा दीपक लघुशंका के लिए गया था, इसलिए जान बच गई। वहीं अर्जुन सिंह, सुनीता, सेजल और भावना की मृत्यु हो गई।

 

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लोगों की जुटी भीड़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अर्जुन सिंह का शव शुक्रवार शाम को मिल सका था। वहीं उनकी पुत्रवधू मोना का पैर कट गया था। उनका इलाज चल रहा है। शनिवार को चारों मृतकों के शव आगरा लाए गए। श्राइन बोर्ड ने दो गाड़ियों से शवों को ताबूत में बंद कर भेजा था। अंतिम दर्शन के लिए पहले ही परिजन और मोहल्ले के लोग जुट गए थे।

 
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वैष्णो देवी हादसा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अर्जुन सिंह की दो बेटियां पूजा और रीना घर में ही मौजूद थीं जबकि दो बेटी नीलम और यासमीन जम्मू से ही शवों के साथ आई थीं। घर आने के बाद बेटियों ने माता-पिता सहित अन्य के चेहरे दिखाने के लिए जिद की। जैसे ही चेहरे खोले गए पूजा और रीना बेसुध हो गईं।
 
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परिजनों के नहीं रुके आंसू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अन्य दो बेटियां और बेटा फूट-फूटकर रोने लगे। यह दृश्य देखकर हर कोई रो पड़ा। 10 मिनट रुकने के बाद शवों को परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए ले गए। भावना का शव शाहगंज स्थित आवास पर ले जाया गया। जूता कारीगर और उनकी पत्नी को मुखाग्नि दीपक के चचेरे भाई ने दी। 11 महीने की सेजल को दफना दिया गया।
 
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बेसुध हो गए परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गड़गड़ाहट के साथ गिरे शिलाखंड, सब छिन गया
अचानक तेज आवाज के साथ गड़गड़ाहट होने लगी, बड़े-बड़े शिलाखंड और पानी नीचे गिरने लगे। जब तक कोई संभल पाता कई लोग उसके साथ बह गए। मम्मी पापा और भतीजी सहित चारों लोग मौत के आगोश में समा गए। मैं दूर थी जान बच गई। मगर सब कुछ तबाह हो गया। हादसे ने सब कुछ छीन लिया। यह कहते हुए यासमीन रोने लगती है। उसे परिवार के लोगों ने संभाला।
 
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शवों को देख परिवार में कोहराम मच गया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जूता कारीगर अर्जुन सिंह सहित चार लोगों के शव घर लाए गए थे। उनकी बेटी यासमीन के आंसू नहीं रुक रहे थे। माता-पिता, भाभी, भतीजी सहित पांच लोग पीछे थे। दीपक लघु शंका के लिए रुक गया था। माता-पिता सहित पांच लोग चपेट में आ गए। बहते चले गए। हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहा था। 


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