भारत विश्व गुरु होने के नाते पूरी दुनिया को करुणा और मैत्री के साथ मानवता का संदेश दे रहा है। हत्यारों को छोड़कर उन सभी को प्रेम के साथ रहने की शुरुआत भारत को अपनी तरफ से करनी चाहिए, क्योंकि भारत में इतनी क्षमता है कि वह इस कार्य को कर सकता है। आज आधुनिक भारत के दौर में लोग भी पाश्चात्य संस्कृति की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं जबकि यहां के लोगों को अपनी अर्थव्यवस्था और आंतरिक विकास के ऊपर अध्ययन करना चाहिए। ये बातें तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहीं। दलाई लामा रमणरेती में दो दिवसीय यात्रा पर आए हैं।
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रमणरेती में कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे दलाई लामा मीडिया से बातचीत के दौरान
- फोटो : अमर उजाला
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा पहला देश है जिसने सबसे पहले हमारा साथ दिया। मुझे उम्मीद है कि अमेरिका सबसे बड़ा ताकतवर देश होने के नाते अन्य छोटे देशों की भी मदद करेगा।
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कार्ष्णि गुरु शरणानंद के साथ दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला
दलाई लामा ने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है। हिंदुस्तान भी जनसंख्या के मामले में दूसरे नंबर पर आता है और दोनों ही पड़ोसी राज्य हैं। चीन में बौद्ध धर्म और नालंदा सभ्यता को लेकर लोग अध्ययन करते हैं। जबकि भारत में भी नालंदा सभ्यता के बौद्ध धर्म को मानने वाले बड़ी संख्या में लद्दाख और कई जगह पर नालंदा प्रगति को लेकर लोग अध्ययन करते रहते हैं। मगर भारत ऐसा देश है जहां करुणा और मैत्री को लेकर दुनिया को हजारों सालों से मानवता का संदेश देता रहा है।
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आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला
मुंबई जहां पर मात्र 1,00000 ईसाई बाकी अन्य धर्म के लोगों के साथ बड़े मानवता और प्रेम के साथ रहते हैं। बिना किसी डर के वह हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी लोगों के साथ अपना जीवन गुजार रहे हैं। वहीं हिंदुस्तान में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो छोटे-छोटे हिंदू-मुस्लिम के झगड़े जैसे शिया-सुन्नी धर्म के लोग आपस में झगड़ा करते हैं जोकि अनुचित है और भारत को ऐसे झगड़ों को रोकने की जरूरत है।
अनुयायियों के साथ आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
दलाई लामा ने कहा कि छात्रों की शुरू की शिक्षा से लेकर यूनिवर्सिटी तक सभी को करुणा मैत्री मानवता और मिलजुल कर विकास करने का पाठ पढ़ाया जाना अति आवश्यक है।