अनलॉक का तीसरा चरण चल रहा है, लेकिन ब्रजभूमि पर पहले जैसी रौनक नहीं लौटी है। इस बार कोरोना के कारण यहां पर्वों का उल्लास भी फीका रहा। पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बड़े आयोजन नहीं हुए। गोवर्धन में मुड़िया पूर्णिमा मेला नहीं लगा। बरसाना में राधाष्टमी मेले को भी निरस्त कर दिया गया है। वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पट भी भक्तों के लिए बंद हैं। लॉकडाउन से पहले इन मंदिरों में आराध्य के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती थी, आज यह सूने हैं। भक्त अपने आराध्य के दर्शन को तरस रहे हैं। अगली स्लाइड्स में देखिए लॉकडाउन से पहले की तस्वीरें....
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की कतार (लॉकडाउन से पहले की तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर लॉकडाउन से पहले भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती थी। देश-विदेश से प्रतिदिन हजारों भक्त यहां आते थे। मंदिर में प्रवेश के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग जाती थीं। लेकिन अदृश्य कोरोना वायरस ने यह भव्य दृश्य बदल दिया।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर (अनलॉक के बाद की तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज में जन्माष्टमी पर बड़े आयोजन होते थे। इस बार यह पहला मौका था, जब बिना भक्तों के भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सहित सभी मंदिरों को भव्य सजावट जरूर की गई, लेकिन कोरोना के कारण मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहा।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़ (लॉकडाउन से पहले)
- फोटो : Amar Ujala
वृंदावन के ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के आंगन में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती थी, आज वो सूना है। प्रमुख पर्वों पर भी बांकेबिहारी मंदिर के पंट भक्तों के लिए नहीं खोले गए।
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बांकेबिहारी मंदिर (अनलॉक के बाद)
- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर होली के बाद से बंद है। अनलॉक-3 में भी मंदिर के पट भक्तों के लिए नहीं खुले हैं। मंदिर के अंदर सेवायतों द्वारा ठाकुरजी की सेवा पहले की भांति की जा रही है।
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द्वारिकाधीश मंदिर (अनलॉक के बाद की तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के जन्मस्थान और द्वारिकाधीश मंदिर भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन वीकंड लॉकडाउन में प्रवेश की अनुमति नहीं है। बाकी पांच दिन भी बहुत लोग ही दर्शन को पहुंच रहे हैं।
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दानघाटी मंदिर के बाहर भक्तों की भीड़ (लॉकडाउन से पहले)
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में गोवर्धन में लगने वाला राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेला लॉकडाउन के कारण नहीं लग सका। इस मेले में लाखों की भीड़ उमड़ती थी। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर आस्था का जनसैलाब दिखाई देता था।
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दानघाटी मंदिर के बाहर सन्नाटा (लॉकडाउन के दौरान)
- फोटो : Amar Ujala
पांच महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर रौनक नहीं लौटी। गोवर्धन के दानघाटी मंदिर और मानसी गंगा के मुखारबिंद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद हैं।
हर साल राधाष्टमी महोत्सव पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु बरसाना आते हैं, लेकिन इस बार राधा जन्मोत्सव के दर्शन नहीं हो पाएंगे। 25 और 26 अगस्त को राधारानी मंदिर में सादगी के साथ लाडलीजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।