आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के पुराने भवनों की बार-बार मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उनकी हालत जर्जर बनी हुई है। कई भवनों में प्लास्टर और ईंटें गिर रही हैं, छतों से पानी टपक रहा है और सरिया बाहर निकल आई है।
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भ्रष्टाचार की तस्वीरें
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज, उम्र 172 साल। इंटीग्रेटेड प्लान में 41 भवन तोड़े जा चुके हैं। अभी पांच भवन बचे हैं, आरोप लग रहा है कि यही इन दिनों कमाई का जरिया बने हैं। हर एक-दो साल में मरम्मत और करोड़ों रुपये की मलाई खाने का खेल चल निकला है। वहीं इस पर पर्दे के लिए भ्रष्टाचार की परतें बिछाई जा रही हैं। छत से गिरते प्लास्टर, दीवारों से झांकती ईंट और सरिया खुद इसकी गवाह हैं।
वर्ष 2021 में इंटीग्रेटेड प्लान मंजूर हुआ, जिसमें परिसर के लेडी लॉयल (महिला अस्पताल) को मिनी एम्स की तरह बनाना तय हुआ। ऐसे में इसकी पुराने 41 भवनों को तोड़ दिया गया। अब मेडिसिन विभाग, एकेडमिक ब्लॉक, नेत्र रोग, बाल रोग विभाग और ओपीडी कॉम्प्लेक्स में ही मरीजों का इलाज और भर्ती करने का काम किया जा रहा है। इनमें हर एक-दो साल में प्लास्टर गिरने, छज्जा गिरने, पानी टपकने की परेशानी के लिए बजट बनाकर मरम्मत का कार्य कराया गया।
आरोप है कि इसमें धांधली के चलते चंद महीनों में ही जर्जर होने लगे। प्लास्टर गिरने से बच्चे की मौत के बाद तो अब इस पर सवाल भी उठाए जाने लगे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि भवन वर्षों पुराने हैं। जरूरत पर मरम्मत हुई। इनकी ऑडिट की जा रही है, जिसे शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद कार्ययोजना बनेगी।
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बाल रोग विभाग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सूरत-ए-हाल
बाल रोग विभाग : दो वार्ड की छत टूटी
इसकी सबसे ज्यादा खराब हालत है। बीते कुछ वर्षों में दो से तीन बार मरम्मत हो चुकी है। दो कमरों की छत टूट चुकी है। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ गए हैं। सीवेज लाइन भी चोक है। पानी टपक रहा है।
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नेत्र रोग विभाग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नेत्र रोग विभाग : छत से गिरा प्लास्टर
विभाग में भी दो बार मरम्मत की खानापूर्ति की गई। पुरुष वार्ड के बगल के हॉल की छत से कई जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ है। इस भवन में कई जगह दरारें हैं। बाउंड्री भी कई जगह टूट चुकी है।
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एकेडमिक ब्लॉक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एकेडमिक ब्लॉक : झांक रहीं सरिया
ब्लॉक में लेक्चर रूम, एसपीएम, फॉरेंसिक, एनॉटमी, माइक्रोबायलॉजी और पैथोलॉजी विभाग है। इसमें दो-तीन बार मरम्मत हो चुकी है। कई जगह दरारें हैं, प्लास्टर तोड़कर सरिया बाहर दिख रही है।
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ओपीडी कॉम्प्लेक्स
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ओपीडी कॉम्प्लेक्स : भवन जर्जर, गिर रहीं ईंटें
इस भवन में बाल रोग, मानसिक रोग, एआरटी सेंटर, मधुमेह की ओपीडी चल रही है। गर्ल्स हॉस्टल को शिफ्ट करते हुए मरम्मत कराने के बाद ओपीडी शुरू की। भवन जर्जर हो गया है, प्लास्टर और ईंटें भी गिर रही हैं।
इनकी भी हालत अच्छी नहीं
मेडिसिन विभाग, नर्सिंग कॉलेज, पुस्तकालय, गेस्ट हाउस, फार्मेसी विभाग की भी हालत अच्छी नहीं है। भवन जर्जर हो रहे हैं। कई जगह से प्लास्टर और ईंट गिर रही हैं। इनमें भी कई बार मरम्मत कार्य हो चुका है।