एटा में आजकल झाल गोपालपुर प्रकृति प्रेमियों को खूब लुभा रहा है। यहां हजारा नजर में एक-दो नहीं, बल्कि कई मगरमच्छ लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। नहर के दोनों ओर की पटरियों के किनारे उगी घास पर मगरमच्छ गुनगुनी धूप सेंकते मिल जाएंगे। यहां एक के ऊपर एक पड़े मगरमच्छ दूर से देखने पर किसी पेड़ की डाल सरीखे नजर आते हैं, लेकिन आसपास काई हरकत होते पलक झपकते ही पानी में उतर जाते हैं।
विज्ञापन
2 of 5
हजारा नहर के पास खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
जिले में मारहरा से आगरा रोड होते हुए फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक जाने वाली हजारा नहर में झाल गोपालपुर पर बांध बनाया हुआ है। यहां पानी रोकने के कारण अधिकांश मगरमच्छ आगे बहकर जाने के बजाय जिले की सीमा में ही रह जाते हैं। ग्रामीणों का अनुमान है कि हजारा नहर में करीब 100 के आसपास मगरमच्छ हैं।
विज्ञापन
3 of 5
नहर में मगरमच्छ
- फोटो : अमर उजाला
हजारा नजर का पक्कीकरण होने के कारण जगह-जगह काम चल रहा है। इसके चलते अधिकांश मगरमच्छ पास ही गांव सूरतपुर के तालाब में उतर आए हैं। इस तालाब में करीब 25 से 30 मगरमच्छ तैरते और किनारे पर आराम करते दिखेंगे।
4 of 5
नहर किनारे मगरमच्छ
- फोटो : अमर उजाला
गांव सूरतपुर निवासी अनिल के खेत में एक मगरमच्छ आ गया था। उन्होंने बताया कि यह मगरमच्छ ग्रामीणों को किसी तरह की क्षति नहीं पहुंचाते हैं, बल्कि लोगों को देख चुपचाप पानी में चले जाते हैं। अक्सर किसान खेतों पर काम करते रहते हैं और मगरमच्छ समीप ही पड़े धूप सेकते रहते हैं।
निचली मांट ब्रांच गंग नहर के रूप में जानी जाने वाली हजारा नहर के दोनों ओर झाड़ियां और खेत हैं। यहां विभिन्न प्रकार के पक्षी और पानी में मछलियों को पकड़ने और देखने के लिए आसपास के लोगों का जमावड़ा लगा रहता है।