सेहत के लिए ताजनगरी जाग उठी। कोरोना से जंग के लिए शहर से देहात तक के 45 लाख लोग रविवार को सुबह से रात तक घरों में ही रहे। अपने और दूसरों के स्वास्थ्य के लिए रखे गए अभूतपूर्व बंद में चाय की दुकानें, पान के खोखे तक नहीं खुले। हर तरफ सन्नाटे के बीच शाम को पांच बजते ही लोगों ने घंटे, घड़ियाल, तालियां, थालियां और शंख बजाकर सेहत के सैनिकों का आभार जताया। लोगों ने संकल्प लिया है कि कोरोना वायरस के परास्त होने तक रविवार के जनता कर्फ्यू की तरह घर में ही रहेंगे।
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पार्क रहे बंद
- फोटो : अमर उजाला
शहर के पालीवाल पार्क, कमला नगर के सेंट्रल पार्क में सुबह योग करने और टहलने वाले नहीं आए। लोगों में एक ही भावना नजर आई, कोरोना से जंग में कुछ कमी नहीं छोड़नी है। सिकंदरा में स्पेस टॉवर के लोग सुबह न दूध लेने गए और न ही दूधिया आया। महर्षिपुरम में रश्मि यादव ने घर के अंदर ताला लगा दिया ताकि कोई बाहर न जा पाए। देहली गेट पर हर कर्फ्यू में खुली रहने वाली चाय की दुकानों पर सुबह से ताला लटका रहा।
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सेहत के सैनिकों को किया सलाम
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भावना एस्टेट में 20 अपार्टमेंट हैं। इनमें रहने वाले एक हजार से ज्यादा परिवारों ने एक साथ घंटे और तालियां बजाई तो पूरा इलाका गूंज उठा। कमला नगर, दयालबाग, जयपुर हाउस, छावनी, शाहगंज, लोहामंडी, मंटोला, सैयदपाड़ा सहित पूरे शहर में तालियां, शंख, घंटे, घड़ियाल और थालियां ठीक पांच बजे गूंजे।
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पांच बजते ही गूंज उठा पूरा शहर
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कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हुए खंदारी के जूता कारोबारी ने भी शाम पांच बजे अपने घर से तालियां बजाकर स्वास्थ्य कर्मियों, जिला प्रशासन का आभार जताया। परिवार के सदस्यों ने इसकी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी जारी किया। उधर, पांच बजते ही लगातार पांच दिन तक पूरा शहर शंख, घंटा-घड़ियाल, थाली और ताली की ध्वनि से गूंजता रहा।
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एमजी मार्ग पर सन्नाटा
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कंट्रोम रूम : एमजी रोड से माल रोड तक सिर्फ सन्नाटा
स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम में पूरे शहर का सन्नाटा एकसाथ नजर आया। एमजी रोड पर दोपहर एक बजकर तीन मिनट पर सिर्फ एक टाटा-407 थी। पुलिस ने इनसे जानकारी की तो पता चला ये लोग एक व्यक्ति का दाहसंस्कार करके लौटे थे। ठीक इसी समय माल रोड पर न कोई व्यक्ति था और न ही कोई वाहन। एनएच-2 पर दो ट्रक चल रहे थे। दीवानी तिराहा, सूर सदन पर सन्नाटा पसरा था।
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बिजलीघर चौराहा
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ऐसा कर्फ्यू तो पहली दफा देखा
कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जनता कर्फ्यू जैसा बंद आगरा के लोगों को पहली बार देखने को मिला। शहरवासियों का कहना था कि 1992 में अयोध्या कांड के दौरान कर्फ्यू लगा था, लेकिन सभी सेवाओं की बंदी पहली बार देखने को मिली है। यहां तक कि बच्चे भी सड़कों पर क्रिकेट खेलते नजर नहीं आए।
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आगरा में लॉकडाउन
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रुनकता के आबिद ने जनता कर्फ्यू के लिए शादी टाल दी। रविवार को बरात धौलपुर के बसेड़ी के लिए जानी थी। बराती तो जुटे नहीं, कुछ लोग यह सलाह देने जरूर आए कि ऐसे में जाना ठीक नहीं है। आबिद भी राजी हो गया। उसने कहा कि कोरोना से जंग के लिए शादी एक दिन बाद ही सही। तय हुआ कि बरात सोमवार को जाएगी। दुल्हन पक्ष को फोन से सूचना दे दी गई।
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एमजी मार्ग पर सन्नाटा
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युवा हों या बुजुर्ग सबका यही कहना है कि इस संकट का सामना करने का दूसरा कोई तरीका है ही नहीं। महर्षिपुरम के राजेंद्र सिंह जन्मदिन पर भी घर में ही रहे। उनका कहना है कि 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के समय पूरा परिवार घर में रहता था। रात को बिजली भी नहीं जलाते थे। अब तो टीवी, मोबाइल बहुत सारी चीजें हैं समय बिताने की, तब तो ऐसा कुछ नहीं था।
कोरोना फैलता जा रहा है। अगर कोई चपेट में आ जाए जो 15-20 दिन अस्पताल में रहना पड़ता है। इससे बेहतर है कुछ दिन घर पर परिवार केसाथ रहें। - शुभम, लंगड़े की चौकी
रविवार को घर पर रहे तो कोई परेशानी नहीं हुई। लॉक डाउन का समय ऐसे ही बीत जाएगा। घर से तभी निकलेंगे जब बाहर जाना कोरोना के खतरे से बाहर होगा। - नीतू वर्मा, आवास विकास
चीन और इटली का हाल मीडिया में देखा है। हम अपने देश में खतरे को इस स्तर तक नहीं जाने देंगे। हर शख्स घर में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाए तो देश कोरोना से जंग जीत जाएगा। - नीरज सिंह , गांधी नगर
कोरोना ऐसा दुश्मन है, जो दिखाई नहीं देता। इससे लड़ने के लिए घर में रहना जरूरी है। हम इसे समझ गए हैं, सभी को समझना चाहिए। - मनोज सिंह, कमला नगर