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कोरोना संक्रमण का एक साल: अब कोरोना की कोई चेन नहीं, संक्रमण का ग्राफ भी तेजी से नीचे गया

Thu, 04 Mar 2021 07:58 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • 554012: लोगों के नमूनों की हुई जांच
  • 10540: लोग कुल हुए संक्रमित
  • 10348: मरीज हो चुके हैं ठीक
  • 174: मरीजों की हो चुकी है मौत
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आगरा में कोरोना वायरस का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में मार्च में पहली बार कोरोना के मरीज मिले थे। यह विदेश से लौटा एक परिवार था। इसके बाद संक्रमण की कई चेन बनीं और बीमारी फैलती चली गई। कोरोना संक्रमण का एक साल पूरा हो जाने पर ताजनगरी के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि पिछले तीन महीनों में कोई नई चेन नहीं बनी है। इस दौरान संक्रमण का ग्राफ भी तेजी से नीचे गया है, और अब मार्च में ही कोरोना संक्रमण शून्य पर आ चुका है। कोरोना संक्रमण का एक साल पूरा हो चुका है। पिछले तीन महीनों में संक्रमण का ग्राफ भी तेजी से नीचे गया है। मरीजों की मृत्यु दर में भी कमी आई है। संक्रमित हुए लोगों में से 98 फीसदी से भी ज्यादा वायरस को मात दे चुके हैं। इन 12 महीनों में 5.50 लाख लोगों के नमूनों की जांच करने पर 10544 लोग संक्रमित पाए गए। इनमें से 6975 पुरुष, 3351 महिलाएं और 214 बच्चे थे। 174 मरीजों की मौत हुई। लोहामंडी क्षेत्र का 24 दिन का शिशु सबसे कम उम्र का और आवास विकास क्षेत्र की 103 साल की वृद्धा सबसे उम्रदराज मरीज रहे।
 
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स्वास्थ्य की जांच करती टीम - फोटो : अमर उजाला
अगस्त में फेल हुआ था आगरा मॉडल
अगस्त में आगरा मॉडल फेल हो गया था। कारण यह था संक्रमण तेजी से फैल रहा था। एसएन में मरीजों को उपचार न मिलने की शिकायतें थीं। अगस्त से नवंबर तक संक्रमण सबसे चरम पर रहा। अगस्त में 1145, सितंबर: 2818, अक्तूबर 1528 और नवंबर में 2004 मरीज मिले। इन चार महीनों में 7495 संक्रमित मिले। यह 12 महीनों के कुल मरीजों में से आधे हैं।
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कोरोना वायरसः जांच के लिए नमूने लेते कर्मी - फोटो : अमर उजाला
दिसंबर में बदली कहानी, मॉडल सफल
दिसंबर में आगरा मॉडल सफल हो गया। इसे अन्य जिलों में लागू किया गया। कारण यह था कि दिसंबर से संक्रमण की दर तेजी से घटी। इसका एक कारण होम आइसोलेशन भी रहा। होम आइसोलेशन में 6502 मरीज भर्ती रहे और ठीक हुए। इनमें से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। अभी 18 मरीज होम आइसोलेेशन में इलाज करा रहे हैं।

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कोरोना संक्रमित मिलने के बाद हॉटस्पॉट एरिया (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
ऐसे बनीं चेन
1. पहली चेन मार्च 2020 में विदेश से लौटे लोगों की बनी।
2. दूसरी चेन जमात से लौटे लोगों की थी, यह अप्रैल में बनी थी।
3. तीसरी चेन अप्रैल-मई में बनी, यह स्वास्थ्यकर्मियों की थी।
4. चौथी चेन मई और जून में सामने आई, यह चिकित्सकों की थी।
5. पांचवीं चेन पुलिसकर्मियों की थी, यह जून और जुलाई में बनी।
6. छठी चेन थी सब्जी वालों और दूध वालों की, ये जून से अगस्त में बनी।
7. सातवीं चेन मेडिकल स्टोर संचालकों की थी, यह अगस्त से अक्तूबर तक रही।
8. आठवीं और आखिरी चेन अक्तूबर और नवंबर में बनी, यह व्यापारियों की थी।
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एसएन मेडिकल कॉलेज में खड़ी एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
तब से अब तक 
03 मार्च: खंदारी निवासी जूता कारोबारी का परिवार संक्रमित हुआ।
07 मार्च: एसएन कॉलेज में आगरा कैंट निवासी युवती भर्ती हुई।
16 मार्च: संक्रमण को मात देकर कारोबारी के बेटे डिस्चार्ज हुए।
07 अप्रैल: कमला नगर निवासी 76 साल की वृद्धा की हुई मौत।
20 अप्रैल: संक्रमित गर्भवती महिला का प्रसव कराया गया।
23 अप्रैल: डॉ. आरके सिंह ने प्लाज्मा दान किया।
16: जनवरी: कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई।
05 फरवरी: एसएन कॉलेज का कोविड अस्पताल हुआ खाली।
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डॉ. आशीष गौतम का थाली बजाकर करते स्वागत बच्चे (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
एसएन कॉलेज ही बन गया था दूसरा घर
एसएन के फिजीशियन डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में अस्पताल में रहकर ड्यूटी कर रहे थे, 14 दिन के लिए क्वारंटीन रहना होता था। एसएन में ही रहते, खाते और काम करते। बच्चों और पत्नी से वीडियो कॉल से ही बातें हो पाती थीं। 

संक्रमित होने पर भी वीडियो कॉल से किया इलाज
एसएन के फिजीशियन डॉ. अजीत चाहर ने बताया कि संक्रमित होने पर भी मरीजों का इलाज करते रहे। घर से वीडियो कॉल कर मरीजों का हाल जानते और जूनियर डॉक्टर को इलाज बताते। कभी ज्यादा तकलीफ भी होती तो भी अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।
 
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आगरा में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
सीमित संसाधनों में शुरू किया उपचार
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि संक्रमण के शुरूआती दौर में जिला अस्पताल में ही इलाज और नमूने लेने की सुविधा थी, पीपीई किट, मास्क सीमित थे, लेकिन इन्हीं में 12-16 घंटे रहकर टीम मरीजों का इलाज करती थी। स्टाफ पसीने से तरबतर हो जाते थे।

16 घंटे से अधिक काम कर करते रहे नमूनों की जांच
एसएन के माइक्रोबायलॉजी विभाग के डॉ. संदीप सिंह ने बताया कि अगस्त से नवंबर तक संक्रमण की दर तेज रही और एक दिन में तीन से चार हजार नमूनों की जांच करते थे। इसके लिए 14 से 16 घंटों तक लैब में ही रहते थे।

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आगरा: टीका लगवातीं चिकित्सक डॉ. सरोज सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
संक्रमित गर्भवती महिलाओं के किए ऑपरेशन
एसएन स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने बताया कि जब संक्रमित महिलाओं के प्रसव को सभी ने हाथ खड़े कर दिए, तब एसएन में ही संक्रमित गर्भवती का प्रसव हुआ। दिन देखा न रात, चिकित्सकों की टीम जुटी रही।

आईसीयू में मरीजों के परिजन बनकर निभाई जिम्मेदारी
कोविड आईसीयू की सहप्रभारी डॉ. अनामिका मिश्रा ने बताया कि आईसीयू में मरीजों के इलाज के साथ उनके परिजनों की भूमिका भी निभाई। अपने हाथों से नाश्ता और खाना तक खिलाया। यहां तक कि रात में कोई परेशानी होने पर आईसीयू में दौड़ पड़ते।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला - फोटो : अमर उजाला
पुलिस, चिकित्सकों ने साथ दिया
कोरोना महामारी में पुलिस, चिकित्सक और समाजसेवियों का पूरा सहयोग रहा। इससे व्यवस्थाएं दुरुस्त रहीं। आगरा मॉडल भी प्रभावी रहा। लोगों ने भी लॉकडाउन का पालन किया। - डॉ. आरसी पांडेय, सीएमओ

दिनरात की मरीजों की सेवा
एसएन के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड ब्वॉय, सफाई कर्मचारी समेत सभी ने दिनरात संक्रमित मरीजों के इलाज में सेवा दी। इनके बलबूते ही कोरोना से जीत पाए। - डॉ. संजय काला, प्राचार्य एसएन

नियमों का पालन करते रहें
कोरोना महामारी में जहां कई शहरों में स्थिति अभी भी नियंत्रित नहीं है, ऐसे में आगरा में संक्रमण की दर सबसे कम रह गई है। ऐसे ही नियमों का पालन करते रहें। - डॉ. आरएम पचौरी, अध्यक्ष आईएमए
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