वर्ल्ड हेरिटेज साइट फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर प्रबंधन के आपसी विवाद में हुई मारपीट और दरगाह को बंद करने का मामला दिल्ली तक पहुंचा है, जिसके बाद दरगाह परिसर की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को देने पर चर्चा की जा रही है। सीकरी के साथ ही देश के 12 अन्य स्मारकों की सुरक्षा सीआईएसएफ के जवान संभाल सकते हैं।
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ताजमहल में तैनात सुरक्षा कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
तीन साल पहले सीआईएसएफ ने सीकरी में तैनाती के समय प्रस्ताव भेजा था, जिस पर मौजूदा विवाद के कारण गंभीरता से चिंतन मनन चल रहा है। सीआईएसएफ 18 साल से ताजमहल के रेड जोन की सुरक्षा संभाल रहा है। बाहरी दखल और कॉमर्शियल गतिविधियों पर ताज में पूरी तरह रोकने में सीआईएसएफ सफल भी रहा है।
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बवाल के दौरान सूना पड़ा मुख्य स्थल (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में हर दिन हो रहे विवाद, मारपीट, लपकागिरी, अंदर दुकानों के लगने, चादरपोशी में ठगी जैसी शिकायतों को रोकने के लिए सीआईएसएफ की तैनाती को लेकर बुधवार को भी संस्कृति मंत्रालय में चर्चा की गई। एएसआई महानिदेशक स्तर पर सीकरी की शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं। कई पर्यटकों ने ट्वीट किया था, जिस पर नाराजगी भी जताई गई। यही वजह रही कि पुलिस को सख्त रुख दिखाना पड़ा।
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बवाल के बाद वापस लौटते पर्यटक (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में फतेहपुर सीकरी, आगरा किला, अकबर का मकबरा में सीआईएसएफ को तैनात करने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय स्तर पर चल रहा है। संस्कृति मंत्रालय सुरक्षा को लेकर चिंतित भी है। सीआईएसएफ कमांडेंट पहले ही सीकरी की सुरक्षा और जवानों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम बनाने की जगह देख चुके हैं। सीआईएसएफ केपोस्ट बनाए जाने के साथ प्रवेश और निकास पर जवान तैनात करने का प्लान बनाया जा चुका है। संस्कृति मंत्रालय सीआईएसएफ की तैनाती पर खर्च और व्यवहारिकता पर भी मनन कर रहा है।
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घटना के दौरान की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
अधीक्षण पुरातत्वविद के वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि फतेहपुर सीकरी में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सीआईएसएफ तैनात करने का प्रस्ताव मेरे कार्यकाल से पूर्व का है, जिस पर मुख्यालय को फैसला करना है।
एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष शमशुद्दीन ने बताया कि सीकरी में दरगाह परिसर में चादरपोशी और धर्म के नाम पर ठगी की जा रही है। इससे पर्यटन बदनाम हो रहा है। चादरपोशी की रकम में सभी की मिलीभगत है, इसीलिए ऐसी घटनाएं रुकती नहीं। यही वजह है कि पर्यटक दरगाह नहीं, केवल महल घूमकर जा रहे हैं।