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दर्शकों का इंतजार हुआ खत्म, तीन शो में दिखाईं फिल्में, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइज के बीच खाली रहीं सीटें

Fri, 16 Oct 2020 12:36 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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सिनेमाघर खुलने के बाद दर्शकों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद दिया प्रवेश - फोटो : अमर उजाला
सात महीने बाद गुरुवार को सिनेमा घर खुल गए। हालांकि पहले दिन सिर्फ चार ही सिनेमा घर खुले। अन्य आज (शुक्रवार) को खुल रहे हैं। 700 दर्शकों ने लंबे इंतजार के बाद बड़े पर्दे पर फिल्म देखी तो उनके चेहरे खिल उठे। दिनभर में 20 फीसदी सीटें ही भर पाईं। दर्शक कम होने के कारण तीन-तीन शो ही चल पाए। इनमें से कई ऐसे भी थो जो हर फिल्म का पहला दिन पहला शो देखने के शौकीन हैं।
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चित्रा सिनेमा - फोटो : अमर उजाला
शहर में 11 सिंगल स्क्रीन और पांच मल्टीप्लेक्स है। इनमें चार सिनेमाघर ही खुले। जिसमें महालक्ष्मी, राजीव, चित्रा और हीरा टाकीज शामिल रहे। सभी शो में दर्शकों को अंतर से बैठाया गया। हालांकि दर्शकों की संख्या कम थी। 
 
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थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मिला प्रवेश - फोटो : अमर उजाला
थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मिला प्रवेश
शो से पूर्व थर्मल स्क्रीनिंग और बीच बीच में सैनिटाइशेन होता रहा। डीसी और फर्स्ट क्लास में बैठने वालों की संख्या अधिक रही। मास्क पहने दर्शकों को ही प्रवेश दिया गया।

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सिनेमाघर में फिल्म देखते दर्शक - फोटो : अमर उजाला
आखिरकार शुरुआत तो हुई
पहले दिन 4 सिनेमाघर ही खुले। बाकी के 12 शुक्रवार को खुलने की उम्मीद है। वहीं, करीब 700 दर्शक ही पहुंचे। अच्छी बात यह है कि शुरुआत तो हुई। - सुबोध गर्ग, अध्यक्ष आगरा एग्जीबिटर्स एसोसिएशन

त्योहारी सीजन में बढ़ेंगे दर्शक 
काफी लंबे समय बाद काम शुरू होने से राहत मिली है। फिलहाल दर्शक अधिक नहीं है। लेकिन त्योहारी सीजन में संख्या बढ़ने की उम्मीद है। - अमित गोयल, चित्रा टॉकीज।
 
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सिनेमाघर में दर्शक - फोटो : अमर उजाला
सात महीने से कुछ अधूरा सा लग रहा था
काफी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर फिल्म देखकर अच्छा लगा। सात महीने से ऐसे लग रहा था कि जैसे कुछ अधूरा हो। - गनेश, शाहगंज।

टीवी पर सिनेमा जैसा मजा कहां

यूं तो घर पर भी फिल्म देख रहे थे लेकिन सिनेमा घर की बात ही कुछ और हो। फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखता हूं, उम्मीद है जल्द ही पुराने जैसे दिन फिर लौटेंगे। -  राम, रुई की मंडी।

फिल्म देखकर ही रविवार होता है पूरा 
हर बार नहीं लेकिन दो बार में रविवार को फिल्म अवश्य देख लेता था। इसी से रविवार की छुट्टी पूरी होती थी। - श्रवण, दयाल नगर।
 
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