आगरा में एनएच 2 पर हुए हादसे के बाद अस्पताल लाए गए मासूम बच्चों के इलाज के लिए धरती के भगवान कहे जाने वाले डाक्टर अभिभावक की भूमिका में नजर आए।
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
एक के बाद एक घायल बच्चे एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी लाए जा रहे थे। नन्हीं जानों को खून से लथपथ हाल में देख एक बार तो डाक्टर भी सहम गए। दर्द और डर के मारे बच्चों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
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ऐसे में इलाज के साथ बच्चों को चुप कराना बड़ी चुनौती रहा। क्या करते, ऐसे में डाक्टर अभिभावक बन गए। कभी पुचकारते तो कभी गले लगाकर सांत्वना देते। इलाज के बाद वार्ड में शिफ्ट किए तो कुछ महिला डाक्टर उनके पास ही रहीं।
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वे बार-बार सब ठीक है, कहकर दिलासा देती। पांच साल की आशीन के कपड़े खून से सने हुए थे। बच्ची बार-बार खून को देख डर रही थी। तत्काल वरिष्ठ डाक्टर ने अपने घर फोन किया और आशीन की हमउम्र अपनी बच्ची के कपड़े मंगवाए।
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मां खुद घायल थी, ऐसे में बच्ची के कपड़े बदलने का जिम्मा भी डाक्टरों ने उठाया। दुलारते-पुचकारते हुए बच्ची को जैसे-तैसे कपडे़ पहनाए।
कुछ सामान्य हालात में आने पर बच्चों के खाने और पीने के लिए डाक्टर फिकरमंद दिखे। वार्ड में भी दो महिला चिकित्सकों को उनकी देखरेख के लिए अतिरिक्त लगाया है।